चित्रकूट के मऊ ब्लॉक का कन्भई पुरवा आज भी विकास की राह देख रहा, बिजली और सड़क की कमी से ग्रामीण परेशान

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विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण विकास का आकलन केवल योजनाओं की घोषणा या कागजी प्रगति से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि अंतिम छोर पर बसे परिवारों तक बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाएं कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं। कन्भई पुरवे की समस्या में बिजली और सड़क दोनों का स्थायी समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।

लवलेश कुमार  चित्रकूट संवाददाता

प्रशासन हिट एंड हॉट न्यूज़

स्थान चित्रकूट उत्तर प्रदेश

दिनांक 10 अगस्त 2026

चित्रकूट। देश और प्रदेश में गांवों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए लगातार विकास योजनाएं संचालित किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन चित्रकूट जनपद के मऊ ब्लॉक का एक छोटा-सा पुरवा आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता नजर आ रहा है। ग्राम पंचायत परधवां के कन्भई पुरवा के ग्रामीणों का कहना है कि बिजली और बेहतर सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं अब तक उनके जीवन का हिस्सा नहीं बन सकी हैं। इसका सीधा असर खेती, आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक पुरवे में बिजली की समस्या कोई नई बात नहीं है। कई वर्षों से लोग विद्युत आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं। बिजली के खंभे लगाए जाने के बावजूद नियमित बिजली कनेक्शन और आपूर्ति शुरू नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पुरवे तक पहुंचने वाला रास्ता भी उनकी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।

दशकों से बिजली का इंतजार

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्थानीय निवासी कैलाश ने बताया कि कन्भई पुरवे में रहने वाले लोग पिछले 30 से 35 वर्षों से बिजली की सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से ग्रामीणों को उम्मीद रही कि एक दिन उनके घरों तक बिजली पहुंचेगी और बच्चों की पढ़ाई से लेकर खेती-किसानी तक में सुविधा होगी, लेकिन इंतजार अभी समाप्त नहीं हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार पुरवे में बिजली के खंभे तो लगाए गए, लेकिन उनके घरों तक विद्युत आपूर्ति नहीं पहुंच सकी। इससे लोगों के बीच यह सवाल भी उठता है कि यदि आधारभूत ढांचा तैयार किया गया था, तो बिजली की आपूर्ति शुरू करने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई।

बिजली की अनुपलब्धता का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव खेती पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का जीवन काफी हद तक कृषि पर निर्भर है और सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने से उन्हें मौसम पर निर्भर रहना पड़ता है।

सिंचाई व्यवस्था प्रभावित, खेती पर बढ़ता दबाव

कृषि क्षेत्र में बिजली की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि खेतों की सिंचाई के लिए बोरिंग या पंप जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो किसान अपनी फसल को समय पर पानी दे सकते हैं। लेकिन कन्भई पुरवे के ग्रामीणों के मुताबिक बिजली की समस्या के कारण सिंचाई की व्यवस्था विकसित करना मुश्किल हो रहा है।

किसानों के लिए खेती केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि परिवार के भरण-पोषण का मुख्य आधार भी है। ऐसे में सिंचाई की समस्या का असर सीधे उनकी आय और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली की नियमित व्यवस्था हो जाए तो वे खेती से जुड़ी कई सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे खेती में सुधार के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सड़क की बदहाली बनी दूसरी बड़ी समस्या

कन्भई पुरवे के सामने दूसरी प्रमुख समस्या सड़क और आवागमन की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुरवे तक पहुंचने वाला रास्ता खराब और अधूरा है। बरसात या खराब मौसम में स्थिति और कठिन हो जाती है।

खराब सड़क का असर केवल आने-जाने तक सीमित नहीं रहता। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, किसानों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के काम के लिए बाहर निकलने वाले लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों के मुताबिक किसी जरूरी काम के लिए बाजार या आसपास के क्षेत्र तक पहुंचना भी कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

गांव की सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। बेहतर सड़क होने से ग्रामीणों को बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होती है। ऐसे में सड़क की स्थिति सुधारना ग्रामीणों के लिए प्राथमिक आवश्यकता बन गई है।

आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों ने सड़क की खराब स्थिति को स्वास्थ्य और आपातकालीन परिस्थितियों से भी जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब हो जाए या किसी गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़े, तो खराब रास्ते के कारण परेशानी बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंचना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी है। सड़क की स्थिति बेहतर होने से मरीजों को अस्पताल तक ले जाने में समय कम लग सकता है। इसके विपरीत खराब मार्ग आपात स्थिति में परिवारों की चिंता बढ़ा देता है।

ग्रामीणों की मांग है कि उनके पुरवे को बेहतर सड़क से जोड़ा जाए, ताकि सामान्य दिनों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी आवागमन सुगम हो सके।

चुनाव के समय आते हैं वादे, फिर इंतजार

कन्भई पुरवे के ग्रामीणों की नाराजगी का एक कारण यह भी है कि उन्हें लंबे समय से विकास के आश्वासन मिलते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि गांव में आते हैं और बिजली, सड़क तथा अन्य सुविधाओं को लेकर भरोसा दिलाते हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक चुनाव समाप्त होने के बाद विकास कार्यों को लेकर वही सक्रियता दिखाई नहीं देती। उनका कहना है कि वर्षों से आश्वासन सुनने के बावजूद जमीन पर अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।

यह शिकायत केवल वर्तमान समय की नहीं बताई जा रही है। पुरवे के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय में कई चुनाव देखे हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के मामले में अपेक्षित परिवर्तन नहीं हुआ।

बुजुर्ग हरदीन ने बयां किया दर्द

करीब 70 वर्षीय हरदीन ने ग्रामीणों की समस्या को अपनी जिंदगी के अनुभव से जोड़ते हुए बताया कि उन्होंने अपने जीवन में गांव के भीतर ऐसा स्थायी विकास कार्य नहीं देखा, जिससे लोगों की समस्याओं का लंबे समय के लिए समाधान हो सके।

बुजुर्गों के लिए बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं केवल विकास का आंकड़ा नहीं हैं। इनका सीधा संबंध रोजमर्रा के जीवन की सुविधा और सम्मान से है। उम्रदराज लोगों को खराब रास्तों पर आवागमन में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ शिकायत करना नहीं, बल्कि अपनी मूलभूत जरूरतों को प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाना है।

युवाओं के सामने भी चुनौतियां

बिजली की कमी का असर गांव के युवाओं और विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है। आज शिक्षा और रोजगार की तैयारी में डिजिटल संसाधनों का महत्व बढ़ गया है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और ऑनलाइन अध्ययन जैसी सुविधाओं के लिए बिजली आवश्यक है।

ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर तभी अधिक सुलभ हो सकते हैं, जब आधारभूत सुविधाएं मजबूत हों। कन्भई पुरवे के लोगों की मांग इसलिए केवल बिजली और सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जिससे आने वाली पीढ़ी को बेहतर अवसर मिल सकें।

प्रशासन से जल्द समाधान की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि कन्भई पुरवे की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और बिजली तथा सड़क की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

उनकी प्रमुख मांगों में विद्युत आपूर्ति शुरू कराना, खराब रास्ते को दुरुस्त कर पक्की सड़क का निर्माण कराना और बुनियादी सुविधाओं की नियमित निगरानी शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर समयबद्ध तरीके से काम करें तो पुरवे की तस्वीर बदली जा सकती है।

विकास योजनाओं का लाभ जमीन तक पहुंचना जरूरी

ग्रामीण विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा माना जाएगा, जब योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बसे परिवारों तक पहुंचे। बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं किसी भी गांव के विकास की बुनियादी जरूरत हैं।

कन्भई पुरवे के ग्रामीणों की समस्या यह सवाल भी खड़ा करती है कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी जमीनी निगरानी को किस तरह और प्रभावी बनाया जाए। केवल खंभे लगा देना पर्याप्त नहीं, बल्कि विद्युत आपूर्ति वास्तव में घरों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसी तरह सड़क का निर्माण या स्वीकृति तभी सार्थक होगी, जब ग्रामीणों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिले।

निष्कर्ष

चित्रकूट के मऊ ब्लॉक स्थित कन्भई पुरवे की कहानी उन ग्रामीण इलाकों की चुनौतियों को सामने लाती है, जहां बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद अभी भी पूरी तरह पूरी नहीं हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक दशकों से बिजली का इंतजार और खराब सड़क उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर है। उनकी मांग स्पष्ट है—बिजली की व्यवस्था शुरू हो, सड़क का स्थायी समाधान हो और विकास कार्य केवल आश्वासन तक सीमित न रहें। यदि संबंधित विभाग उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान करते हैं, तो कन्भई पुरवे के लोगों के लिए यह केवल सुविधाओं का विस्तार नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

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