पूर्व विधायक किशोर समरीते को संसद उड़ाने की धमकी देने के मामले में दोषी करार, विस्फोटक अधिनियम से बरी

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक किशोर समरीते को संसद को डायनामाइट से उड़ाने की धमकी देने के मामले में दोषी करार दिया है। हालांकि, उन्हें विस्फोटक अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
किशोर समरीते, जो मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की लांजी विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं, पर आरोप था कि उन्होंने सितंबर 2022 में राज्यसभा के महासचिव को एक धमकी भरा पत्र भेजा था। इस पत्र में कुछ मांगे रखी गई थीं और एक संदिग्ध पदार्थ भी संलग्न किया गया था। पत्र में उन्होंने संसद को डायनामाइट से उड़ाने की धमकी दी थी।
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) के अंतरराज्यीय सेल (ISC) के इंस्पेक्टर विवेक मलिक ने 16 सितंबर 2022 को प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने किशोर समरीते के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और विस्फोटक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।
कोर्ट का फैसला
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने किशोर समरीते को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506 पार्ट II के तहत दोषी करार दिया। हालांकि, अदालत ने उन्हें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 5(a) और विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9B(1)(b) के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।
अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इस बात का संदेह से परे प्रमाण हैं कि अभियुक्त किशोर समरीते ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 भाग II के तहत दंडनीय अपराध किया है।”
क्या है धारा 506 पार्ट II?
भारतीय दंड संहिता की धारा 506 पार्ट II के तहत यदि कोई व्यक्ति गंभीर धमकी देता है, जिससे किसी की जान को खतरा हो सकता है या सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना होती है, तो उसे इस धारा के तहत दंडित किया जाता है।
किशोर समरीते को मिली राहत
हालांकि, अदालत ने यह माना कि अभियोजन पक्ष विस्फोटक पदार्थ से संबंधित आरोपों को साबित करने में असमर्थ रहा। इसी कारण उन्हें विस्फोटक अधिनियम से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया गया।
क्या होगा आगे?
अब अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद किशोर समरीते को IPC की धारा 506 पार्ट II के तहत सजा सुनाई जाएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें कितनी सजा दी जाती है और क्या वह इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।
निष्कर्ष
यह मामला भारतीय राजनीति और कानून व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें संसद को धमकी देने जैसे गंभीर मामलों को अदालत ने संज्ञान में लिया। हालांकि, विस्फोटक अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध न होने के कारण किशोर समरीते को आंशिक राहत मिली है, लेकिन IPC की धारा 506 पार्ट II के तहत उन्हें दोषी पाया गया है। अब सभी की नजर इस पर होगी कि उन्हें आगामी सुनवाई में कितनी सजा मिलती है।
