फ़रवरी 13, 2026

अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (IIAS) की अध्यक्षता

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भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराते हुए अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (IIAS) की अध्यक्षता प्राप्त कर ली है। यह महत्वपूर्ण पद अब 2025 से 2028 तक भारत के पास रहेगा। यह उपलब्धि न केवल भारत की प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि विश्व मंच पर इसके नेतृत्व की स्वीकार्यता को भी प्रमाणित करती है।

IIAS क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (IIAS) एक वैश्विक संस्था है जो सार्वजनिक प्रशासन, नीति निर्माण और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच प्रशासनिक अनुभव साझा करना, बेहतर नीतिगत समाधान तैयार करना और सुशासन को प्रोत्साहित करना है।

भारत की भूमिका और महत्व

भारत की अध्यक्षता इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक मंच पर भारत के प्रशासनिक मॉडल को गंभीरता से लिया जा रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा की पारदर्शिता, जवाबदेही और नवाचार की दिशा में उठाए गए कदम अब विश्व के अन्य देशों के लिए उदाहरण बन रहे हैं।

अध्यक्ष बनने से भारत को यह अवसर मिलेगा कि वह विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज़ को प्रमुख मंचों पर प्रस्तुत कर सके। इसके साथ ही भारत पारंपरिक प्रशासनिक ढांचे में तकनीकी नवाचार, डिजिटल गवर्नेंस और लोक सहभागिता जैसे विषयों को प्राथमिकता दे सकेगा।

आगे की राह

इस नई भूमिका में भारत की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। भारत अब न केवल नीति-निर्धारण में अग्रणी भूमिका निभाएगा, बल्कि अन्य देशों को उनके प्रशासनिक सुधारों में मार्गदर्शन भी प्रदान करेगा। इससे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय भावना को भी बल मिलेगा।

निष्कर्ष

IIAS की अध्यक्षता भारत को एक नई वैश्विक पहचान दिलाती है। यह उपलब्धि न केवल एक पद की प्राप्ति है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारत अब केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि वैश्विक प्रशासनिक विकास का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। यह कदम भविष्य में भारत के लिए अनेक द्वार खोलेगा और उसे वैश्विक नीति निर्धारण में एक निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर देगा।


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