भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई: पीएम मोदी और रिचर्ड मार्लेस की अहम मुलाकात

नई दिल्ली, 4 जून 2025 — भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक रिश्तों को और अधिक मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री श्री रिचर्ड मार्लेस ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के साझा लक्ष्य को बल मिला।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की हालिया संघीय चुनावों में लेबर पार्टी की ऐतिहासिक जीत पर श्री मार्लेस को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया समग्र रणनीतिक साझेदारी के पाँच वर्षों की उपलब्धियों को सराहा और इसके विस्तार के लिए नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
सहयोग के नए आयाम
मुलाकात के दौरान निम्नलिखित विषयों पर विशेष चर्चा हुई:
- रक्षा औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने की आवश्यकता,
- महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में साझेदारी,
- आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती देने के लिए समन्वय,
- नवीन और उभरती प्रौद्योगिकियों में मिलकर नवाचार को बढ़ावा देना।
इन पहलों का उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय व्यापार और सुरक्षा संबंधों को मज़बूत करना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की भूमिका को अधिक प्रभावशाली बनाना भी है।
आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता
उप प्रधानमंत्री मार्लेस ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का समर्थन करते हुए, सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में ऑस्ट्रेलिया के निरंतर सहयोग की पुष्टि की। यह संकेत है कि दोनों देशों के बीच केवल आर्थिक और रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के मुद्दों पर भी गहरा विश्वास और सहयोग मौजूद है।
आगामी शिखर सम्मेलन का आमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री श्री एंथनी अल्बानीज़ को वर्ष 2025 के अंत में भारत में आयोजित होने वाले वार्षिक भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया। इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से दोनों देशों के बीच चल रही रणनीतिक चर्चाओं को एक नई दिशा देने की संभावना है।
निष्कर्ष
यह मुलाकात भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के इतिहास में एक और मील का पत्थर साबित हुई। बदलते वैश्विक परिदृश्य में, जब भू-राजनीतिक अस्थिरता और तकनीकी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, ऐसे समय में दोनों देशों के नेताओं का एकजुट दृष्टिकोण एक सशक्त, स्थिर और सहयोगात्मक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की नींव रखने की दिशा में एक मजबूत संकेत है।
