फ़रवरी 14, 2026

प्रधानमंत्री मोदी को साइप्रस का सर्वोच्च सम्मान: ‘ग्रांड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मैकारियोस III’

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Anoop singh

16 जून 2025 का दिन भारत और साइप्रस के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रांड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मैकारियोस III’ से अलंकृत किया। यह सम्मान न केवल प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक स्तर पर भूमिका और नेतृत्व को मान्यता देता है, बल्कि दोनों देशों के गहरे और मजबूत होते संबंधों का प्रतीक भी है।

सम्मान ग्रहण करते समय प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की ओर से स्वीकार किया और साइप्रस के राष्ट्रपति, सरकार तथा वहां की जनता के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट की। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार भारत और साइप्रस के दीर्घकालीन मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रमाण है, जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और समान दृष्टिकोण पर आधारित हैं।

वसुधैव कुटुम्बकम का दर्शन

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मान भारत के प्राचीन दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’‘विश्व एक परिवार है’ की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत है। उन्होंने जोर दिया कि यही दृष्टिकोण आज वैश्विक शांति, प्रगति और सहयोग का मार्गदर्शक बना हुआ है।

भारत-साइप्रस साझेदारी को नई दिशा

प्रधानमंत्री ने इस पुरस्कार को दोनों देशों की साझेदारी को और सुदृढ़ करने की एक नई प्रतिबद्धता के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने शांति, सुरक्षा, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और समृद्धि के लिए भारत और साइप्रस की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को और व्यापक और विविध बनाएंगे।

सम्मान का महत्व

‘ग्रांड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मैकारियोस III’ साइप्रस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट योगदान दिया हो। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि की पुष्टि करता है बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक है।

निष्कर्ष

यह सम्मान भारत और साइप्रस के बीच मित्रता और सहयोग की नई ऊंचाइयों की शुरुआत का संकेतक है। प्रधानमंत्री मोदी का यह अलंकरण न केवल दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा।


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