फ़रवरी 14, 2026

भारतीय विदेश नीति: उद्देश्यपूर्ण और व्यवहारिक दृष्टिकोण की ओर अग्रसर

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Anoop singh

19 जून, 2025 — भारत की विदेश नीति ने हाल के वर्षों में एक नया और गतिशील मोड़ लिया है, जिसमें रणनीतिक स्वतंत्रता, बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक मंच पर प्रभावी भूमिका की दिशा में स्पष्ट परिवर्तन देखा जा रहा है। भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एक सक्रिय और दूरदर्शी कूटनीतिक रणनीति अपनाकर वैश्विक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा रहा है।

रणनीतिक साझेदारियाँ और उद्देश्यपूर्ण सहयोग

भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस और पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को न केवल गहराया है बल्कि उन्हें अधिक संरचित और भविष्य उन्मुख बनाया है। यह सहयोग केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापार, प्रौद्योगिकी और जन-से-जन संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी मजबूत हुआ है। इन साझेदारियों से स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक मंच पर एक निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।

भारत-अमेरिका संबंध: एक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी

भारत और अमेरिका के बीच संबंध अब “वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” के रूप में पहचाने जा रहे हैं। यह संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और परस्पर हितों की संगति पर आधारित है। पिछले एक दशक में यह साझेदारी विश्वास और तकनीकी नवाचार पर आधारित मजबूत गठबंधन में तब्दील हो चुकी है।

US-India COMPACT जैसे पहलें — जिनमें सैन्य साझेदारी, व्यापार और तकनीक का समावेश है — इन संबंधों को और अधिक ठोस बनाने में सहायक सिद्ध हुई हैं। “मिशन 500” के तहत, दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। साथ ही, 2025 की शरद ऋतु तक एक व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की योजना है।

रक्षा सहयोग में नई दिशा

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग एक नई ऊँचाई पर पहुँच चुका है। हाल ही में घोषित “मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क” के तहत अगले दस वर्षों तक रक्षा साझेदारी को नए आयाम दिए जाएँगे। भारतीय सशस्त्र बल अब अमेरिकी अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों जैसे C-130J, C-17, P-8I, Apache और MQ-9B प्लेटफॉर्म से सुसज्जित हो रहे हैं, जिससे उनकी युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

निष्कर्ष

भारत की विदेश नीति अब केवल परंपरागत संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने उद्देश्यपूर्ण और व्यवहारिक दृष्टिकोण को अपनाकर वैश्विक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। यह नीति भारत को एक आत्मनिर्भर, प्रभावशाली और तकनीकी रूप से सक्षम वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।


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