मध्य पूर्व संघर्ष पर मैक्रों की कूटनीति: नेतन्याहू से बातचीत में ईरान खतरा और गाज़ा संघर्ष पर विशेष ज़ोर

25 जून 2025,
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से एक महत्वपूर्ण बातचीत की, जिसमें मध्य पूर्व की अस्थिर स्थिति, ईरान का बढ़ता परमाणु खतरा, और गाज़ा में मानवीय संकट पर गहन चर्चा हुई। इस संवाद ने यह स्पष्ट कर दिया कि फ्रांस क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
संवेदनशील युद्धविराम बनाए रखने की अपील
राष्ट्रपति मैक्रों ने बातचीत की शुरुआत मौजूदा संघर्षविराम की नाजुक स्थिति को रेखांकित करते हुए की। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है, ताकि कोई नया तनाव उत्पन्न न हो। उनका मानना है कि संवाद और कूटनीति ही इस क्षेत्र में स्थायित्व ला सकती है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम: क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा
बातचीत का एक बड़ा हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं पर केंद्रित रहा। मैक्रों ने नेतन्याहू के साथ यह साझा चिंता व्यक्त की कि “ईरान को कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” उन्होंने इस मुद्दे को हल करने के लिए राजनयिक वार्ता को फिर से शुरू करने की वकालत की और साथ ही मिसाइल गतिविधियों पर भी नियंत्रण की बात दोहराई, जो इज़रायल समेत पूरे क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।
गाज़ा में स्थायी संघर्षविराम और मानवीय सहायता की मांग
गाज़ा पट्टी में हो रहे मानवीय संकट को लेकर मैक्रों ने चिंता जताई और वहां तत्काल व स्थायी संघर्षविराम लागू करने की बात कही। उन्होंने बंधकों की रिहाई, मानवीय सहायता की बिना रुकावट आपूर्ति और राजनीतिक समाधान के तौर पर दो-राष्ट्र सिद्धांत को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
फ्रांस की दोहरी रणनीति: तात्कालिक संकट प्रबंधन और दीर्घकालिक शांति की दिशा में कदम
यह वार्ता इस बात का प्रमाण है कि फ्रांस केवल वर्तमान में उत्पन्न संकटों को शांत करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए भी प्रयासरत है। मैक्रों ने साफ किया कि उनका प्रशासन केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस कूटनीतिक कार्रवाई के पक्ष में है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति मैक्रों की यह पहल वैश्विक मंच पर फ्रांस की कूटनीतिक सक्रियता और मध्य पूर्व की शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस की यह पहल एक उम्मीद की किरण के रूप में देखी जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद और पहल भविष्य में कोई सकारात्मक परिणाम ला पाएगी या फिर यह भी अन्य प्रयासों की तरह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगी।
