फ़रवरी 13, 2026

25 जून 2025: नेतन्याहू कार्यालय का दावा – अमेरिकी हमले में ईरान का फोर्डो परमाणु ठिकाना ध्वस्त

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Anoop singh

यरूशलेम/तेहरान/वॉशिंगटन:
25 जून 2025 को वैश्विक राजनीति में एक नया भूचाल तब आया, जब इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र पर एक गुप्त सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिससे वह ठिकाना पूरी तरह “अकार्यक्षम” हो गया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है और विश्व शक्तियाँ पहले ही ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर चिंता जता चुकी हैं।

हमले का विवरण और रणनीतिक संदर्भ

नेतन्याहू कार्यालय के अनुसार, यह हमला “सीधी सैन्य आवश्यकता और वैश्विक परमाणु सुरक्षा” को ध्यान में रखते हुए अमेरिका द्वारा किया गया था। इस कार्रवाई में उन्नत बंकर-भेदी हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जो जमीन के भीतर गहराई में बने फोर्डो परमाणु संयंत्र को लक्ष्य बना सके।

हालांकि अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पेंटागन से जुड़े कुछ अनौपचारिक सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि “रणनीतिक खतरे को निष्क्रिय करने के लिए एक तकनीकी मिशन” को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने इस दावे को “झूठा और मनगढंत” बताते हुए खारिज कर दिया है। तेहरान स्थित सरकारी समाचार एजेंसी ने एक बयान में कहा कि फोर्डो संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और वहां कोई नुकसान नहीं हुआ। ईरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यदि किसी देश ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है, तो “उसकी प्रतिक्रिया तीव्र और निर्णायक होगी।”

इज़राइल की मंशा और कूटनीतिक संकेत

नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को “इज़राइल के अस्तित्व के लिए खतरा” बताते रहे हैं। उनका यह बयान इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है कि अमेरिका और पश्चिमी देश ईरान पर और अधिक दबाव बनाएं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के माध्यम से इज़राइल ने दोहरे उद्देश्य साधे हैं – पहला, ईरान को एक स्पष्ट संदेश देना और दूसरा, अमेरिकी सहयोग के प्रति जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करना।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं

इस घटना पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक की संभावना जताई जा रही है। रूस और चीन जैसे देश पहले ही पश्चिमी देशों द्वारा ईरान पर “एकतरफा कार्रवाई” की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में यह घटना क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक जटिल बना सकती है।

यूरोपीय संघ ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी परमाणु स्थल पर सैन्य कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय परमाणु संधियों का उल्लंघन हो सकता है और इसका गंभीर प्रभाव हो सकता है।

निष्कर्ष

यह घटनाक्रम न केवल ईरान और इज़राइल के बीच के संघर्ष को नई दिशा दे सकता है, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह 21वीं सदी की सबसे साहसी गुप्त सैन्य कार्रवाइयों में से एक माना जाएगा। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह कार्रवाई शांति की ओर एक कदम साबित होती है या फिर एक नए संघर्ष की शुरुआत।


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