फ़रवरी 13, 2026

टीम यूरोप द्वारा वैश्विक बाल स्वास्थ्य के लिए 2 अरब यूरो की प्रतिबद्धता: एक नई उम्मीद की किरण

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Anoop singh

25 जून 2025, ब्रुसेल्स/नई दिल्ली:
वैश्विक स्वास्थ्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने घोषणा की है कि टीम यूरोप (Team Europe) आने वाले वर्षों में गावी वैक्सीन एलायंस (Gavi, the Vaccine Alliance) के साथ साझेदारी में 2 अरब यूरो का योगदान देगी। यह योगदान मुख्य रूप से विश्वभर के बच्चों को जीवनरक्षक टीके उपलब्ध कराने और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य जीवन देने की दिशा में इस्तेमाल किया जाएगा।

गावी और टीम यूरोप की साझेदारी: अब तक की उपलब्धि

टीम यूरोप और गावी की यह साझेदारी कोई नई नहीं है। पिछले दशकों में इस सहयोग के तहत एक अरब से अधिक बच्चों को टीकाकरण उपलब्ध कराया गया है, जिससे अनेक जानलेवा बीमारियों की रोकथाम संभव हो पाई है। यह साझेदारी विशेषकर निम्न-आय वाले देशों में बच्चों की जान बचाने और उनके जीवन को सुरक्षित बनाने में अहम साबित हुई है।

नई प्रतिबद्धता क्यों अहम है?

हालांकि अब तक काफी प्रगति हुई है, फिर भी आज भी दुनिया भर में लाखों बच्चे जरूरी टीकों से वंचित हैं। यह नई धनराशि इन बच्चों तक पहुंचने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और नई वैक्सीन तकनीकों को विकसित करने के लिए खर्च की जाएगी। इसमें विशेष ध्यान हाशिये पर जी रहे समुदायों और दूरदराज़ के क्षेत्रों पर रहेगा, जहां स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी कमजोर हैं।

गावी मॉडल की खासियत

गावी का मॉडल सरकारी और निजी क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर टीकों की आपूर्ति और वितरण को प्रभावी और तेज बनाता है। यह वित्तीय सहयोग गावी को और अधिक देशों तक पहुंच बनाने, महामारी जैसी आपात स्वास्थ्य स्थितियों से निपटने और सतत विकास लक्ष्य (SDGs) को पूरा करने में मदद करेगा।

वैश्विक एकता और समानता की मिसाल

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, “हर बच्चे को स्वस्थ जीवन की शुरुआत का अधिकार है। यह न केवल एक वित्तीय सहयोग है, बल्कि एक साझा वैश्विक दृष्टिकोण है।” इस पहल के माध्यम से यूरोप यह संदेश दे रहा है कि वह वैश्विक स्वास्थ्य, मानवता और विकास के लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध है।

निष्कर्ष

टीम यूरोप और गावी की यह नई साझेदारी दुनिया भर के करोड़ों बच्चों के लिए आशा की नई किरण बनकर उभरेगी। इस सहयोग से न केवल बीमारी से बचाव होगा, बल्कि स्वस्थ बचपन के जरिए आने वाली पीढ़ियां भी अधिक सक्षम और सशक्त बनेंगी। यह कदम न केवल स्वास्थ्य का, बल्कि वैश्विक समानता और न्याय का प्रतीक है।


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