बुडापेस्ट प्राइड को लेकर उर्सुला वॉन डेर लेयेन का संदेश: LGBTQI+ अधिकारों की रक्षा को लेकर यूरोपीय संघ का स्पष्ट रुख

ब्रसेल्स, 26 जून 2025 — यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हंगरी सरकार से आग्रह किया है कि वह आगामी बुडापेस्ट प्राइड मार्च को बिना किसी बाधा या कानूनी दमन के संपन्न होने दे। उन्होंने यह भी कहा कि LGBTQI+ समुदाय को डर और भेदभाव से मुक्त माहौल मिलना चाहिए, जो यूरोपीय संघ के लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद है।
उन्होंने LGBTQI+ समुदाय को संबोधित करते हुए भावनात्मक और दृढ़ संदेश दिया, “मैं हमेशा आपकी सहयोगी रहूंगी।” उनका यह वक्तव्य सिर्फ एक औपचारिक बयान नहीं, बल्कि व्यक्तिगत समर्थन और राजनीतिक संकल्प का प्रतीक है।
हंगरी में LGBTQI+ अधिकारों पर चिंता
हंगरी सरकार की नीतियों को लेकर बीते कुछ वर्षों में यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों द्वारा आलोचना होती रही है। खासकर LGBTQI+ से जुड़े कुछ कानूनों को लेकर यह चिंता जताई गई है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
ऐसे में बुडापेस्ट प्राइड सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी, समान अधिकारों और सामाजिक पहचान की रक्षा के लिए एक सशक्त प्रदर्शन है।
यूरोपीय संघ की भूमिका
वॉन डेर लेयेन ने दो टूक कहा कि सभी सदस्य देशों को गैर-भेदभाव, समावेशन और गरिमा जैसे मूल सिद्धांतों का पालन करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि LGBTQI+ व्यक्तियों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी या सामाजिक प्रताड़ना यूरोपीय मूल्यों के खिलाफ है।
उनके बयान से यह स्पष्ट संदेश गया है कि यूरोपीय संघ LGBTQI+ अधिकारों को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। यदि कोई सदस्य देश इन मूल्यों से विचलित होता है, तो उस पर राजनीतिक और कानूनी दबाव बनाया जाएगा।
बुडापेस्ट प्राइड: एक अग्निपरीक्षा
इस वर्ष का बुडापेस्ट प्राइड मार्च हंगरी के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है—क्या वह वास्तव में यूरोपीय लोकतांत्रिक आदर्शों और नागरिक स्वतंत्रताओं का सम्मान करता है? यह देखना बाकी है कि हंगरी सरकार वॉन डेर लेयेन की इस सार्वजनिक अपील को कैसे प्रतिक्रिया देती है।
निष्कर्ष
उर्सुला वॉन डेर लेयेन का यह बयान LGBTQI+ अधिकारों के लिए केवल एक नीतिगत समर्थन नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली राजनीतिक और नैतिक संकल्प है। यूरोपीय संघ इस दिशा में स्पष्ट है: हर व्यक्ति को उसकी पहचान, प्रेम और अभिव्यक्ति के साथ जीने का अधिकार है—बिना किसी भय या भेदभाव के।
