फ़रवरी 13, 2026

दक्षिण कॉकस में शांति की वकालत: अर्मेनिया के समर्थन में फिर बोले राष्ट्रपति मैक्रों

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Anoop singh

पेरिस, फ्रांस — 29 जून 2025
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बार फिर अर्मेनिया की संप्रभुता और लोकतांत्रिक स्थिरता के प्रति फ्रांस के अटूट समर्थन को दोहराया है। यह बयान अर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनियन के साथ एक “बेहद सकारात्मक टेलीफोन वार्ता” के बाद सामने आया है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत दक्षिण कॉकस क्षेत्र में शांति स्थापना और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर केंद्रित रही।

मैक्रों ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा संदेश में स्पष्ट किया कि अर्मेनिया के लोकतंत्र को अस्थिर करने के किसी भी प्रयास को फ्रांस पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। उन्होंने कहा कि फ्रांस अर्मेनिया के साथ खड़ा है और लोकतांत्रिक मूल्यों को हर हाल में समर्थन देगा।

राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री पशिनियन की अजरबैजान और तुर्की के साथ संबंध सामान्य करने की पहल को “साहसिक” बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अर्मेनिया द्वारा उठाए जा रहे ये कदम बेहद प्रशंसनीय हैं, खासकर 2020 के नागोर्नो-काराबाख युद्ध के बाद के तनावपूर्ण हालात को देखते हुए।

मैक्रों ने यह भी कहा कि खुली सीमाएं और स्थायी सुलह न केवल अर्मेनिया बल्कि पूरे दक्षिण कॉकस क्षेत्र के लिए एक नया युग ला सकती हैं। यदि यह प्रयास सफल होते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए संघर्ष समाधान का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।

उनका यह संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ्रांस की कूटनीतिक सक्रियता और अर्मेनिया के प्रति उसकी पारंपरिक मित्रता को दर्शाता है।

गौरतलब है कि फ्रांस, ओएससीई मिन्स्क ग्रुप का सह-अध्यक्ष भी है, जिसने वर्षों तक अर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष को सुलझाने की दिशा में पहल की है। ऐसे में राष्ट्रपति मैक्रों का यह बयान न केवल समर्थन का संकेत है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग की दिशा में एक रणनीतिक संदेश भी है।

उनकी इस पहल को यूरोपीय संघ के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें लोकतंत्र, कूटनीति और शांति को प्राथमिकता दी जाती है।


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