मणिपुर के पूर्व कांग्रेस दावेदार की गिरफ्तारी: केरल में 1.84 करोड़ की साइबर ठगी का मामला उजागर

पालक्काड (केरल), 13 फरवरी 2026।
डिजिटल निवेश के नाम पर की जा रही ठगी के एक बड़े मामले में केरल पुलिस ने मणिपुर निवासी और के टिकट के पूर्व दावेदार केशम निंगथेमजाओ सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने ऑनलाइन ट्रेडिंग का झांसा देकर एक कारोबारी से करीब 1.84 करोड़ रुपये ठग लिए। यह कार्रवाई द्वारा पालक्काड में की गई।
ठगी का पूरा तरीका: भरोसे से विश्वासघात तक
जांच के अनुसार, अगस्त से नवंबर 2025 के बीच आरोपी ने व्हाट्सएप के माध्यम से व्यापारी से संपर्क साधा।
- शुरुआती दौर में छोटे निवेश पर मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता गया।
- उसके बाद कथित “हाई रिटर्न” ट्रेडिंग योजनाओं में बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
- कुल 1,84,52,524 रुपये आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए।
- बाद में रकम को चेक के जरिए निकाल लिया गया।
यह तरीका साइबर ठगों की आम रणनीति को दर्शाता है—पहले भरोसा, फिर बड़ा निवेश, और अंत में संपर्क समाप्त।
जांच में क्या सामने आया?
पुलिस ने बताया कि आरोपी का खाता की पोरोमपट शाखा में संचालित था। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस खाते का उपयोग मुख्य रूप से संदिग्ध लेन-देन के लिए किया जा रहा था।
इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और केरल में भी इसी प्रकार के मामलों में उसका नाम सामने आया है। यानी यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय धोखाधड़ी के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
गिरफ्तारी जिला पुलिस प्रमुख के निर्देशन में की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधों पर निगरानी रखने के लिए विशेष टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
बढ़ते साइबर अपराध: एक गंभीर संकेत
यह मामला भारत में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों की चिंता को और गहरा करता है।
- ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश प्लेटफॉर्म के नाम पर जालसाजी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
- ठग सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए सीधे संपर्क कर लोगों को फंसाते हैं।
- डिजिटल भुगतान की आसानी का दुरुपयोग कर रकम तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश से पहले प्लेटफॉर्म और व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जांच करना बेहद जरूरी है।
कानूनी और सामाजिक संदेश
इस गिरफ्तारी से दो बड़े संदेश निकलते हैं—
- कानून से ऊपर कोई नहीं, चाहे उसकी राजनीतिक पृष्ठभूमि क्यों न हो।
- डिजिटल लेन-देन में सतर्कता अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।
साइबर ठगी के मामलों में अक्सर पीड़ित शर्म या सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे अपराधियों को बल मिलता है। ऐसे मामलों की सार्वजनिक जानकारी नागरिकों को सतर्क रहने का अवसर देती है।
निष्कर्ष
मणिपुर के पूर्व राजनीतिक दावेदार की यह गिरफ्तारी केवल एक आर्थिक अपराध का खुलासा नहीं, बल्कि डिजिटल युग की जटिल चुनौतियों की ओर इशारा है। तेजी से बदलती तकनीक के साथ अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में नागरिकों, बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मिलकर जागरूकता और सख्ती दोनों को बढ़ाना होगा, ताकि साइबर अपराध पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
