फ़रवरी 13, 2026

नेपाल में दो तीव्र भूकंप से दहशत, सतही गहराई बनी चिंता का कारण

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Anoop singh

काठमांडू, नेपाल — नेपाल में बीते 24 घंटे के भीतर दो भूकंपों ने धरती को हिला कर रख दिया। रविवार और सोमवार को आए इन झटकों की तीव्रता तो मध्यम थी, लेकिन इनकी सतही गहराई (shallow depth) ने विशेषज्ञों और आम नागरिकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सतही भूकंप ज़मीन के बहुत करीब उत्पन्न होते हैं, जिससे इनके प्रभाव की तीव्रता अधिक हो जाती है।

भूकंपों का विवरण:

  • पहला भूकंप: 4.2 तीव्रता का झटका रविवार, 29 जून 2025 को दोपहर 2:19 बजे आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक इसका केंद्र 29.35°N, 81.94°E निर्देशांक पर था और इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी।
  • दूसरा भूकंप: सोमवार, 30 जून 2025 को सुबह 8:24 बजे 3.9 तीव्रता का दूसरा झटका महसूस किया गया। इसका केंद्र 29.24°N, 81.77°E पर रहा और गहराई 14 किलोमीटर मापी गई।

इन दोनों भूकंपों का केंद्र नेपाल में ही था, और विशेषज्ञों का कहना है कि ये झटके भले ही तीव्रता में हल्के-मध्यम रहे हों, लेकिन कम गहराई के कारण इनसे होने वाले नुकसान की संभावना अधिक होती है।

क्यों खतरनाक होते हैं सतही भूकंप?

सतही भूकंप वे होते हैं जिनकी गहराई 70 किलोमीटर से कम होती है। इनका प्रभाव अधिक इसलिए होता है क्योंकि इनसे निकलने वाली ऊर्जा सीधे सतह पर महसूस होती है। इसके विपरीत, गहरे भूकंपों की ऊर्जा ज़मीन के अंदर ही काफी हद तक समाप्त हो जाती है।

भूगर्भीय जोखिम क्षेत्र में बसा है नेपाल:

नेपाल एक भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। यह इलाका भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टकराहट के क्षेत्र में आता है। ये प्लेटें निरंतर एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं, जिससे धरती की सतह पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न होता है और यही दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर आता है।

इसके अतिरिक्त, नेपाल एक सबडक्शन ज़ोन में स्थित है, जहां भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे सरक रही है। यही प्रक्रिया हिमालय पर्वत श्रृंखला के निर्माण और लगातार ऊँचाई बढ़ने का कारण भी है। परंतु साथ ही, इससे भूकंपीय गतिविधियों की आवृत्ति और गंभीरता भी बढ़ जाती है।

क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?

सिस्मोलॉजिस्टों का मानना है कि नेपाल जैसे क्षेत्रों में जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है और इमारतें पुराने ढांचे की हैं, वहां सतही भूकंप बहुत अधिक खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे झटकों से इमारतों को क्षति पहुंच सकती है, ज़मीन दरक सकती है, और जनहानि का खतरा बना रहता है।

सावधानी और तैयारी है जरूरी:

हालांकि इन दोनों भूकंपों में फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन ये झटके एक स्पष्ट चेतावनी हैं कि नेपाल को भूकंप से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। विशेषज्ञों ने सख्त और भूकंप-रोधी भवन निर्माण को अनिवार्य करने की सलाह दी है, साथ ही आम जनता के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की भी आवश्यकता पर बल दिया है।

निष्कर्ष:

नेपाल में हाल में आए इन दो भूकंपों ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में भूकंप कोई असामान्य घटना नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में सतर्कता, समय रहते निर्माण मानकों का पालन, और आपदा प्रबंधन की तैयारियों में कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए।


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