एशियाई विकास बैंक ने घटाया विकासशील एशिया की विकास दर अनुमान: व्यापारिक दबावों के कारण आई गिरावट तिथि: 24 जुलाई 2025

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने अपनी ताज़ा एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (ADO) जुलाई 2025 रिपोर्ट में विकासशील एशिया की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कटौती की है। बैंक ने अब 2025 के लिए 4.7% और 2026 के लिए 4.6% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, जो अप्रैल 2025 की 4.9% की पूर्वानुमान से कुछ कम है। यह संशोधन वैश्विक व्यापार तनावों और बढ़ते टैरिफ के कारण क्षेत्रीय आर्थिक गति पर पड़े प्रभाव को दर्शाता है।
क्षेत्रवार विश्लेषण:
1. पूर्वी एशिया:
चीन, दक्षिण कोरिया, हांगकांग और ताइपे जैसे देशों को शामिल करने वाला यह क्षेत्र धीमी आर्थिक वृद्धि का सामना कर रहा है। चीन की वृद्धि दर अब 2025 के लिए 4.7% और 2026 के लिए 4.3% अनुमानित की गई है, जो धीमी होती आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है।
2. दक्षिण एशिया – विकास की रोशनी:
इस क्षेत्र ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। 2025 में दक्षिण एशिया के लिए वृद्धि दर 5.9% और 2026 में 6.2% रहने का अनुमान है। विशेष रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को 2025 और 2026 में समान रूप से 6.7% की मजबूत वृद्धि मिलने की संभावना है, जो पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
3. दक्षिण-पूर्व एशिया:
इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों की अगुवाई में यह क्षेत्र 2025 में 4.7% और 2026 में 5.1% की वृद्धि दर्ज कर सकता है।
4. चीन को छोड़कर विकासशील एशिया:
यदि चीन को अलग रखा जाए तो बाकी विकासशील एशिया 2025 में 5.0% और 2026 में 4.9% की दर से आगे बढ़ने की ओर अग्रसर है।
मुद्रास्फीति का रुझान:
रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति में भी हल्की वृद्धि देखी गई है। अब 2025 में औसत मुद्रास्फीति 2.3% और 2026 में 2.2% अनुमानित की गई है। मध्य एशिया के कुछ देशों जैसे कज़ाखिस्तान और जॉर्जिया में महंगाई के दबाव अधिक महसूस किए जा रहे हैं।
नीतिगत सुझाव:
एडीबी ने इस अद्यतन आउटलुक में यह स्पष्ट किया है कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच नीतिगत लचीलापन और सतत विकास की दिशा में प्रयास बेहद आवश्यक हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता, मूल्य नियंत्रण और निवेश-अनुकूल माहौल बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।
निष्कर्ष:
एशियाई विकास बैंक की यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता और ऊँचे टैरिफ ने एशिया की विकास दर पर असर डाला है। हालांकि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्र आशा की किरण बनकर उभरे हैं। ऐसे में नीति निर्माताओं को आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सजगता और दूरदृष्टि से काम लेना होगा।
