ओडिशा में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा की अनोखी पहल

शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक है जब समाज के हर वर्ग तक उसकी समान पहुँच हो। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए ओडिशा सरकार ने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक अभिनव कदम उठाया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के सिद्धांतों को धरातल पर उतारते हुए राज्य में जिला स्तर पर विशेष मूल्यांकन शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। यह प्रयास न केवल शैक्षिक अवसरों को सभी के लिए खोलता है, बल्कि उन बच्चों की जिंदगी में नई रोशनी भी भरता है, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से दूर रह जाते थे।
👁️ विशेषज्ञों की मदद से व्यापक जाँच
इन मूल्यांकन शिविरों में स्थानीय नेत्र विशेषज्ञ और चिकित्सक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यहाँ बच्चों की आँखों की जाँच, दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान और समय पर उपचार या सहायक साधनों की व्यवस्था की जाती है। परिणामस्वरूप, जो विद्यार्थी सामान्य कक्षाओं में पढ़ने-लिखने में कठिनाई महसूस करते थे, उन्हें समय रहते मदद मिल पाती है और वे आत्मविश्वास के साथ आगे की पढ़ाई कर पाते हैं।
🎓 समान अवसर की दिशा में ठोस प्रयास
समावेशी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य यह है कि हर बच्चे को उसकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार सीखने का अवसर मिले। ओडिशा की यह पहल स्पष्ट करती है कि शिक्षा किसी के लिए भी बाधित नहीं होनी चाहिए। चाहे बच्चा दृष्टिबाधित हो या किसी अन्य चुनौती का सामना कर रहा हो, उसे उचित सहयोग और संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का हक है।
🌍 समावेशी माहौल की स्थापना
राज्य सरकार स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करने की दिशा में कार्यरत है, जहाँ हर विद्यार्थी अपने आपको सुरक्षित, समर्थ और स्वीकार्य महसूस कर सके। इस पहल से न केवल दृष्टिबाधित बच्चों को लाभ होगा, बल्कि यह कदम अन्य विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
🔖 निष्कर्ष
ओडिशा का यह प्रयास वास्तव में #NEP2020 की सफलता की एक मिसाल है। यह दर्शाता है कि जब नीतियों को स्थानीय स्तर पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए, तो शिक्षा हर बच्चे के लिए आशा और सशक्तिकरण का माध्यम बन सकती है। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत यह पहल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण साबित होगी।
