फ़रवरी 13, 2026

अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज: आध्यात्मिक पर्यटन की नई राजधानी बनता उत्तर प्रदेश

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लखनऊ, 22 अगस्त:
भारत की संस्कृति और आस्था की धुरी कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। यहाँ आने वाले यात्रियों और तीर्थयात्रियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे प्रदेश न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से भी नई ऊँचाइयों को छू रहा है।

अयोध्या: राम नगरी का वैश्विक महत्व

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भव्य निर्माण पूरा होने के बाद यहाँ देश-विदेश से श्रद्धालुओं की आमद अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ी है। शहर में विकसित आधुनिक सुविधाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन इसे विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बना रहे हैं।

वाराणसी: सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक

वाराणसी, जिसे काशी और बनारस नामों से भी जाना जाता है, सदियों से हिंदू आस्था का आधार रहा है। गंगा आरती, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और घाटों की पवित्रता ने इसे विश्वभर में धार्मिक पर्यटन की शीर्ष सूची में पहुँचा दिया है।

प्रयागराज: संगम नगरी की अनूठी पहचान

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम इसे विशेष बनाता है। कुंभ और माघ मेला जैसे आयोजन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। आधुनिक ढाँचागत विकास ने इस शहर को तीर्थयात्रियों के लिए और भी सुविधाजनक बना दिया है।

आर्थिक और सांस्कृतिक लाभ

पर्यटन विभाग के हालिया आँकड़ों के अनुसार, इन तीनों शहरों में धार्मिक पर्यटकों की संख्या में पिछले साल की तुलना में लगभग 35% वृद्धि दर्ज की गई है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों की आय में भी तेज़ इज़ाफा हुआ है।

निष्कर्ष

अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज केवल धार्मिक महत्व के स्थल नहीं रहे, बल्कि ये उत्तर प्रदेश को भारत का धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण की मिसाल पेश कर रहे हैं। आने वाले समय में यहाँ की लोकप्रियता और भी बढ़ने की संभावना है।


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