फ़रवरी 15, 2026

जटिलेश्वर मुखोपाध्याय की जयंती पर नमन: बंगाली संगीत परंपरा के अमिट हस्ताक्षर

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बंगाली संगीत की समृद्ध विरासत में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं जिनकी उपस्थिति समय से परे प्रतीत होती है। जटिलेश्वर मुखोपाध्याय ऐसे ही एक महान कलाकार थे, जिन्होंने अपनी साधना, संवेदनशीलता और सृजनशीलता से आधुनिक बंगाली संगीत को नई आत्मा दी। उनकी जयंती पर उन्हें स्मरण करना केवल एक कलाकार को याद करना नहीं, बल्कि एक पूरे सांस्कृतिक युग को सम्मान देना है।

13 दिसंबर 2025 को उनकी जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जटिलेश्वर मुखोपाध्याय बंगाली गीत-संगीत की अमूल्य धरोहर थे। उनके शब्दों ने संगीत प्रेमियों के हृदय को गहराई से छू लिया।

🎼 संगीत की त्रिधारा में साधक

जटिलेश्वर मुखोपाध्याय का रचनात्मक संसार बहुआयामी था। वे केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि गीतकार और संगीत निर्देशक के रूप में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनके गीतों में भावनाओं की कोमलता, शब्दों की सादगी और धुनों की गहराई सहज रूप से महसूस की जा सकती है।

उन्होंने ऐसे समय में संगीत को दिशा दी जब बंगाली गीत परंपरा परिवर्तन के दौर से गुजर रही थी। रवींद्रनाथ ठाकुर, काजी नजरुल इस्लाम और अतुल प्रसाद जैसे महापुरुषों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, जटिलेश्वर मुखोपाध्याय ने आधुनिक बंगाली गीत को नई भाषा और नई संवेदना दी।

🕯️ संगीत जगत को मिली अपूरणीय क्षति

21 दिसंबर 2017 को उनका निधन हो गया। लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याओं से संघर्ष करने के बाद उन्होंने इस संसार से विदा ली। 83 वर्ष की आयु में उनका जाना बंगाली संगीत जगत के लिए गहरी क्षति थी। उस समय भी ममता बनर्जी ने उन्हें एक युगपुरुष बताते हुए कहा था कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।

🌿 आज भी जीवंत है उनकी धुन

जटिलेश्वर मुखोपाध्याय का संगीत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था। उनके गीत आज भी रेडियो तरंगों, संगीत मंचों और घरों में सुनाई देते हैं। उनकी रचनाएं श्रोताओं को भावनात्मक गहराई से जोड़ती हैं और मन को शांत करती हैं।

उन्होंने संगीत को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानवीय अनुभूतियों की सशक्त अभिव्यक्ति बनाया। यही कारण है कि उनकी रचनाएं पीढ़ियों के बीच सेतु का काम करती हैं।

🤍 जनता के हृदय में स्थायी स्थान

उनकी जयंती पर सोशल मीडिया पर श्रोताओं, कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने उन्हें याद किया। श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान से भरे संदेशों में यही भावना झलकती रही कि जटिलेश्वर मुखोपाध्याय केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक अनुभव हैं।

📖 उपसंहार

जटिलेश्वर मुखोपाध्याय बंगाली सांस्कृतिक चेतना के सशक्त प्रतीक थे। उनका संगीत समय की सीमाओं से परे जाकर आत्मा से संवाद करता है। उनकी जयंती पर उन्हें नमन करना उस रचनात्मक विरासत को जीवित रखना है, जिसने बंगाली संगीत को नई पहचान दी और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक मार्ग प्रशस्त किया।


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