फ़रवरी 14, 2026

नेतन्याहू भ्रष्टाचार मामला: वल्ला न्यूज़ और अमनोन से जुड़े दावों ने जांच को दी नई दिशा

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इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ चल रहा बहुचर्चित भ्रष्टाचार मुकदमा एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल i24 न्यूज़ पर वरिष्ठ पत्रकार शेरोन गाल द्वारा प्रस्तुत हालिया रिपोर्ट ने इस कानूनी विवाद को दोबारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। रिपोर्ट में विशेष रूप से वल्ला न्यूज़ वेबसाइट और पत्रकार अमनोन अब्राहम से जुड़े बयानों को जांच की नई धुरी के रूप में रेखांकित किया गया है।


विवाद की पृष्ठभूमि: तीन मामलों में घिरे प्रधानमंत्री

नेतन्याहू के खिलाफ दर्ज आरोप इज़रायली न्यायिक इतिहास के सबसे संवेदनशील मामलों में माने जाते हैं। उन पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोप तीन अलग-अलग मामलों में लगाए गए हैं—
केस 1000, केस 2000 और केस 4000।

इनमें केस 4000 को सबसे गंभीर माना जा रहा है। इस मामले में आरोप है कि प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नेतन्याहू ने अनुकूल मीडिया कवरेज के बदले एक बड़े कारोबारी समूह को नियामकीय लाभ पहुंचाने में भूमिका निभाई।


शेरोन गाल की रिपोर्ट: जांच के केंद्र में नए बयान

i24 न्यूज़ पर प्रसारित रिपोर्ट में शेरोन गाल ने दावा किया कि अमनोन अब्राहम से जुड़े कुछ बयानों और वल्ला न्यूज़ से संबंधित एक औपचारिक शिकायत को अब जांच एजेंसियां गहराई से खंगाल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन पहलुओं को अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।

गवाही के दौरान नेतन्याहू ने बार-बार इस बात को दोहराया कि उन्होंने कभी किसी मीडिया संस्थान पर दबाव नहीं बनाया और न ही समाचारों की दिशा तय करने की कोशिश की। उनके अनुसार, मीडिया से जुड़े आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।


“इतिहास की आत्मा सवाल कर रही है”: प्रतीकात्मक टिप्पणी

रिपोर्ट में एक तीखी प्रतीकात्मक टिप्पणी भी सामने आई, जिसमें कहा गया कि “इज़रायली लोकतंत्र की आत्मा जैसे अपने ही सवालों से बेचैन हो उठी है।” यह टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मीडिया, सत्ता और लोकतंत्र के संबंधों पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।


आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वल्ला न्यूज़ और अमनोन से जुड़े पहलुओं पर ठोस सबूत सामने आते हैं, तो यह मुकदमे की दिशा और गति दोनों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले हफ्तों में अदालत की सुनवाई इस बात को तय करेगी कि यह नया मोड़ केवल आरोपों तक सीमित रहता है या किसी निर्णायक निष्कर्ष तक पहुंचता है।

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