फ़रवरी 18, 2026

लखनऊ में आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव : विकास का नया खाका

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव ने प्रदेश की विकास यात्रा को नई दिशा देने का संकल्प प्रस्तुत किया। यह कॉन्क्लेव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं, स्टार्टअप उद्यमियों, शिक्षाविदों और युवाओं को एक साझा मंच पर लाकर विकास की ठोस रणनीति तैयार करने का गंभीर प्रयास था।

विकसित भारत की अवधारणा और उत्तर प्रदेश की भूमिका

भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है और कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र तथा सांस्कृतिक विरासत के लिहाज़ से समृद्ध संभावनाओं से भरा हुआ है। कॉन्क्लेव में इस बात पर बल दिया गया कि यदि उत्तर प्रदेश आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक दृष्टि से सशक्त बनता है, तो ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन

कॉन्क्लेव का प्रमुख फोकस औद्योगिक निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर था। राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा, सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल सेवाएं और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।

  • एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार
  • औद्योगिक पार्कों और एमएसएमई क्लस्टर्स की स्थापना
  • स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा

इन पहलों से न केवल बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय उद्यमियों और युवाओं के लिए भी नई संभावनाएँ खुलेंगी।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण

उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। कॉन्क्लेव में आधुनिक कृषि तकनीक, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को बाजार से सीधा जोड़ने, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन को मजबूत करने तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की योजनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम

डिजिटल इंडिया की अवधारणा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाओं और टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की रणनीति सामने रखी गई। आईटी पार्क, डेटा सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे।

बुनियादी ढांचा और शहरी विकास

राज्य में सड़क, रेल, मेट्रो और हवाई अड्डों के विस्तार को विकास का आधार माना गया। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को गति मिलेगी और पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और हरित ऊर्जा पहल के माध्यम से टिकाऊ शहरी विकास पर बल दिया गया।

सामाजिक विकास और मानव संसाधन

कॉन्क्लेव में शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता दी गई। नई शिक्षा नीति के तहत कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने की योजनाएँ प्रस्तुत की गईं। स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, टेलीमेडिसिन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई।

निष्कर्ष

‘विकसित भारत-समृद्ध उत्तर प्रदेश’ कॉन्क्लेव ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, अवसरों की समानता और टिकाऊ प्रगति का समग्र दृष्टिकोण है। सरकार, उद्योग और समाज के संयुक्त प्रयासों से उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन सकता है।

यह कॉन्क्लेव भविष्य की रूपरेखा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जिसने ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश की प्रतिबद्धता को मजबूत किया।

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