फ़रवरी 12, 2026

हरियाणा: MSP की लीगल गारंटी पर संघर्षरत किसानों ने सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से मिलने से किया इंकार

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सांकेतिक तस्वीर

फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी को लेकर पिछले 246 दिनों से हरियाणा बॉर्डर पर धरने पर बैठे किसानों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से मिलने से इंकार कर दिया है। किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया है कि वे कमेटी द्वारा दी गई मीटिंग के निमंत्रण को स्वीकार नहीं करेंगे। इस संबंध में किसानों ने कमेटी को एक पत्र भेजकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी का निमंत्रण ठुकराया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने किसान संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से किसी भी कमेटी के गठन की मांग नहीं की थी। उनका यह भी कहना है कि वे कोर्ट में चल रहे मामलों में किसी प्रकार से पक्षकार नहीं हैं। किसानों का आरोप है कि हरियाणा सरकार ने ही अवैध रूप से रास्ते बंद किए हुए हैं, और इसका जिम्मेदार किसानों को ठहराया जा रहा है, जो गलत है।

किसानों के तर्क

किसानों का तर्क है कि उनके द्वारा रास्ते बंद नहीं किए गए हैं बल्कि हरियाणा सरकार की नीतियों के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है। किसानों ने यह भी कहा है कि सरकार उनके विरोध को दबाने का प्रयास कर रही है, जबकि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि उन्हें MSP की कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि उनकी फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जा सके और उनके हितों की सुरक्षा हो सके।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी और किसानों के बीच दूरी

यह फैसला किसानों के उस रुख को मजबूत करता है, जिसमें वे सीधे तौर पर अपनी मांगों पर अडिग हैं और किसी भी कमेटी से मुलाकात को बेकार मानते हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांग, यानी MSP की लीगल गारंटी, को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक वे इस संघर्ष को जारी रखेंगे।

आंदोलन का जारी रहेगा संघर्ष

किसानों ने साफ तौर पर यह संकेत दे दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से मिलने की बजाय सरकार के साथ सीधी बातचीत करना चाहते हैं। किसानों का आंदोलन अब भी उतना ही मजबूत है जितना पहले था, और वे अपनी मांगों को लेकर लगातार दृढ़ता दिखा रहे हैं।

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