सामरिक विचारधारा में नई दिशा: रक्षा मंत्री का राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में भाषण

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2024: रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) के 62वें MPhil पाठ्यक्रम के समापन समारोह में देश के सैन्य नेताओं को रणनीतिक सोच विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियों में, सैन्य नेतृत्व को अनपेक्षित परिस्थितियों के अनुकूल बनने और नवीनतम तकनीकों का लाभ उठाने की आवश्यकता है।
सामरिक सोच की आवश्यकता
रक्षा मंत्री ने कहा कि साइबर हमले, सूचना युद्ध, और आर्थिक युद्ध के माध्यम से एक राष्ट्र को बिना गोली चलाए अस्थिर किया जा सकता है। ऐसे में, सैन्य अधिकारियों को जटिल समस्याओं का विश्लेषण करने और नवोन्मेषी समाधान विकसित करने की क्षमता होनी चाहिए।
तकनीकी प्रगति का महत्व
श्री राजनाथ सिंह ने आज की तकनीकी प्रगति को एक भविष्य के लिए तैयार सैन्य बल का सबसे महत्वपूर्ण तत्व बताया। उन्होंने कहा, “ड्रोन, स्वायत्त वाहन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें आधुनिक युद्ध को आकार देने में तेजी से विकसित हो रही हैं।” उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इन तकनीकों को समझें और उन्हें सैन्य संचालन में उपयोग करें।
निर्णय लेने में AI की भूमिका
रक्षा मंत्री ने AI पर निर्भरता के बढ़ने के साथ-साथ इसके निर्णय लेने में नैतिक दुविधाओं की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि मशीनों को जीवन और मृत्यु के निर्णय लेने की कितनी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। इस संदर्भ में, उन्होंने नैतिकता, दर्शन और सैन्य इतिहास की पढ़ाई के महत्व को उजागर किया।
नैतिक और वैश्विक सुरक्षा पर ध्यान
श्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक सुरक्षा गठबंधनों की जटिलताओं को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि सैन्य निर्णयों के दूरगामी प्रभाव होते हैं। उन्होंने कहा, “आपके निर्णय केवल युद्धभूमि पर ही नहीं, बल्कि कूटनीति, अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय कानून में भी दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।”
शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका
रक्षा मंत्री ने NDC जैसे रक्षा शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, जो भविष्य के नेताओं को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक ज्ञान और नैतिक ढांचा प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पाठ्यक्रम को अद्यतन और प्रासंगिक बनाए रखने के लिए ऑनलाइन, संक्षिप्त मॉड्यूल पेश किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक अधिकारी इसका लाभ उठा सकें।
निचोड़
श्री राजनाथ सिंह ने NDC के 62वें पाठ्यक्रम के सभी अधिकारियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी भारत और अपने देशों के बीच पुल का काम करेंगे और उनके साझा अनुभव क्षेत्रीय सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद करेंगे। उनका यह संबोधन एक नई सामरिक सोच और प्रौद्योगिकी के समावेश का संकेत देता है, जो भविष्य में भारतीय सैन्य बलों की तैयारियों को और मजबूत करेगा।
