फ़रवरी 13, 2026

अमेरिका का जलवायु समझौतों से बाहर जाना: वैश्विक प्रभाव और चुनौती

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जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयासों में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। लेकिन यदि डोनाल्ड ट्रंप पुनः अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में चुने जाते हैं और पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने का अपना निर्णय दोहराते हैं, तो इसका प्रभाव न केवल अमेरिका, बल्कि दुनिया भर पर पड़ सकता है। उनका यह कदम जलवायु वित्त पोषण और वैश्विक जलवायु सहयोग को गंभीर चुनौती दे सकता है।

अमेरिका का कदम और वैश्विक जलवायु समझौते

पेरिस जलवायु समझौते के तहत, विकसित देशों ने विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता देने का वादा किया था। यदि अमेरिका इस समझौते से बाहर निकलता है, तो इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं। जलवायु अनुकूलन और शमन के लिए जरूरी फंडिंग संकट में पड़ सकती है, जिससे कई देश अपने पर्यावरणीय लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे।

चीन का बढ़ता जलवायु नेतृत्व

अमेरिका का पेरिस समझौते से बाहर जाना चीन के लिए एक अवसर हो सकता है। चीन ने अपनी Belt and Road Initiative के तहत पर्यावरणीय दृष्टिकोण से कई ग्रीन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया है और इसके परिणामस्वरूप वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक नेतृत्व के रूप में उभर सकता है। चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, यदि अमेरिका पीछे हटता है तो चीन का जलवायु क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाना तय है।

‘We Are Still In’ आंदोलन का पुनरुद्धार

अमेरिका की संभावित वापसी के बावजूद, अमेरिका के भीतर जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाले राज्य, शहर और कंपनियां ‘We Are Still In’ आंदोलन के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को बनाए रख सकती हैं। इस आंदोलन के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि अमेरिका में जलवायु परिवर्तन से लड़ने का उत्साह कम नहीं हुआ है और यह एक वैश्विक संदर्भ में भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

स्वच्छ प्रौद्योगिकी निवेश और ग्रीन जॉब्स

यह तथ्य कि अमेरिकी कंपनियां और कई अन्य देशों में स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ रहा है, यह संकेत करता है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में निवेश की गति बनी रहेगी। बाजार में स्वच्छ ऊर्जा को लेकर उत्साह और ग्रीन जॉब्स के अवसर इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए, भले ही अमेरिकी सरकार बाहर निकलने का निर्णय ले, यह क्षेत्र आर्थिक लाभ और विकास के लिए मजबूत बना रहेगा।

अर्थव्यवस्था और ‘फ्रेंडशोरिंग’ का समर्थन

ट्रंप का एक और संभावित कदम ‘फ्रेंडशोरिंग’ हो सकता है, जिसके तहत वह उन देशों से संसाधन जुटाने को प्राथमिकता देंगे जो अमेरिका के करीबी रणनीतिक सहयोगी हैं। यह न केवल अमेरिका के लिए स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद करेगा, बल्कि यह वैश्विक जलवायु नीति में भी एक विशेष दृष्टिकोण पेश कर सकता है।

COP29 सम्मेलन का महत्व

COP29 जलवायु सम्मेलन, जो बाकू में आयोजित हो रहा है, अमेरिका की वापसी के बाद एक नई चुनौती का सामना कर सकता है। इस सम्मेलन में वैश्विक जलवायु संकट पर चर्चा की जाएगी, और यह समय बहुत अहम है क्योंकि जलवायु परिवर्तन पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अगर अमेरिका इस समझौते से बाहर जाता है, तो यह सम्मेलन वैश्विक एकजुटता के बजाय विभाजन का कारण बन सकता है, जो जलवायु संकट से निपटने के लिए एक बड़ा कदम नहीं हो सकता।

निष्कर्ष

यदि अमेरिका जलवायु समझौतों से बाहर निकलता है, तो इससे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में गंभीर रुकावट आ सकती है। हालांकि, अन्य देशों द्वारा की जा रही जलवायु पहल, जैसे चीन के ग्रीन प्रोजेक्ट्स और स्वच्छ प्रौद्योगिकी में निवेश, इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक सहयोग की आवश्यकता बनी रहेगी, और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इस संघर्ष में कोई भी देश पीछे न हटे।

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