फ़रवरी 12, 2026
Anoop singh

भारत की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और शिल्प कौशल को प्रदर्शित करने के लिए आदि महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य आयोजन 16 से 24 फरवरी 2025 तक नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित होगा। इस प्रतिष्ठित महोत्सव का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु करेंगी।

महोत्सव का उद्देश्य और महत्व

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड) इस उत्सव का आयोजन कर रहा है, जो देशभर के 600 से अधिक कारीगरों, 500 प्रदर्शनकारी कलाकारों और 25 आदिवासी खाद्य स्टॉलों को एक मंच प्रदान करेगा।

प्रमुख आकर्षण

  • लाइव प्रदर्शन: विभिन्न राज्यों के आदिवासी कलाकार अपने पारंपरिक शिल्प, नृत्य और संगीत का प्रदर्शन करेंगे।
  • व्यापारिक सहयोग: 20 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और 35 प्रशिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: श्रीलंका और इंडोनेशिया से प्रतिनिधिमंडल इस उत्सव में भाग लेंगे।
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ब्रांड एकीकरण: 8 प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जनजातीय उत्पादों को प्रमोट किया जाएगा।
  • आदिवासी पाक-कला: खाद्य उत्पादों की डिजिटल ऑनबोर्डिंग के लिए IFCA के साथ साझेदारी की गई है।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण: एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए नेस्ट के साथ समझौता किया गया है।
  • महुआ जैसे लघु वन उत्पादों के लिए समझौता: इनके मूल्य संवर्धन के लिए HPMC के साथ समझौता किया गया है।

महोत्सव का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल है। यह उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और उनकी पारंपरिक कला को आधुनिक उपभोक्ताओं तक लाने का प्रयास है।

जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि यह महोत्सव राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में आदिवासी कारीगरों के लिए नए अवसर खोलेगा और उनकी आजीविका को मजबूत करेगा।

ट्राइफेड की भूमिका

जनजातीय मामलों के सचिव श्री विभु नायर ने कहा कि ट्राइफेड इस महोत्सव को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि तकनीकी नवाचार, रणनीतिक साझेदारियों और उन्नत विपणन अवसरों के साथ यह अब तक का सबसे प्रभावशाली आयोजन होगा।

ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री आशीष चटर्जी ने सभी नागरिकों से इस महोत्सव में भाग लेने और भारत के स्वदेशी कारीगरों की कला और शिल्प कौशल को समर्थन देने की अपील की।

निष्कर्ष

आदि महोत्सव 2025 जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति का प्रतीक है। यह महोत्सव न केवल उनकी कला और संस्कृति को प्रदर्शित करता है, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका के नए अवसर भी प्रदान करता है। यह आयोजन सरकारी अधिकारियों, कॉर्पोरेट नेताओं और आम जनता को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे भारत के आदिवासी कारीगरों और उद्यमियों को व्यापक स्तर पर पहचान और सहयोग मिलेगा।

इस महोत्सव का हिस्सा बनें और भारत की जनजातीय विरासत का अनूठा अनुभव प्राप्त करें!

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