यहाँ पूर्वोत्तर भारत के पुनरुत्थान पर आधारित एक 100% मौलिक और अद्वितीय हिंदी लेख प्रस्तुत है, जो केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर समिट’ में दिए गए वक्तव्य पर आधारित है:

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📰 शीर्षक: पूर्वोत्तर से उभरता भारत: विकास, निवेश और संभावनाओं की नई दिशा
नई दिल्ली, 23 मई 2025 — भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अब एक नई पहचान मिल रही है — एक प्रगतिशील, समावेशी और रणनीतिक विकास केंद्र के रूप में। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर समिट’ के मंच से निवेशकों को इस क्षेत्र की उभरती संभावनाओं की ओर आकर्षित करते हुए कहा, “पूर्वोत्तर अब केवल सीमांत नहीं रहा, बल्कि यह नए भारत की धड़कन बन रहा है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के चलते पूर्वोत्तर भारत में बीते एक दशक में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। जहाँ पहले इस क्षेत्र को उपेक्षित माना जाता था, वहीं अब यह दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव का प्रवेश द्वार बनता जा रहा है।
📌 जलमार्गों से विकास की धारा
श्री सोनोवाल ने बताया कि पूर्वोत्तर भारत के आर्थिक विकास में अंतर्देशीय जलमार्गों की भूमिका क्रांतिकारी बन रही है। अब इस क्षेत्र में 20 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्ग अधिसूचित किए गए हैं। ‘जलवाहक योजना’ के तहत मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक हब्स के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है, जिससे स्थानीय रोजगार और व्यापार दोनों को मजबूती मिल रही है।
📌 भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट (IBPR) और सितवे पोर्ट जैसे रणनीतिक पहल भारत की समुद्री ताकत को नया आयाम दे रहे हैं। इससे पूर्वोत्तर के सामान और सेवाओं की पहुंच अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक हो रही है।
🧭 स्वास्थ्य पर्यटन: “हील इन इंडिया” का केंद्र
पूर्वोत्तर की प्राकृतिक सुंदरता, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ और स्वास्थ्य अवसंरचना को एक साथ जोड़ते हुए मंत्री जी ने इसे मेडिकल ट्रैवल टूरिज्म का भविष्य बताया। “हील इन इंडिया” पहल के तहत इस क्षेत्र को वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।
📈 समावेशी विकास और कौशल निर्माण
पूर्वोत्तर के युवाओं के लिए समुद्री कौशल विकास कार्यक्रमों की शुरुआत की जा रही है, जिससे उन्हें पोर्ट संचालन, लॉजिस्टिक्स और पोत प्रबंधन में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह प्रयास न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त करेगा बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
🌏 अंतर्राष्ट्रीय संपर्क की शक्ति
श्री सोनोवाल ने यह भी रेखांकित किया कि पूर्वोत्तर की बाजार संभावनाएँ केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। यह क्षेत्र सीधे ASEAN और BBIN देशों से जुड़ता है, जिससे निवेशकों को 600 मिलियन से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुँच मिलती है — जो इसे निवेश के लिए एक अति-आकर्षक गंतव्य बनाता है।
👥 समिट में भागीदारी
‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर समिट’ में कई प्रमुख घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों, नीति निर्माताओं और विकास एजेंसियों ने भाग लिया। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि पूर्वोत्तर भारत अब उस मोड़ पर है जहाँ से वह भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की नई प्रेरणा बन सकता है।
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✍️ निष्कर्ष:
पूर्वोत्तर भारत अब विकास की मुख्यधारा में है। उसकी रणनीतिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन, युवा जनसंख्या और सरकारी नीतियों का समर्थन मिलकर इसे भारत के भविष्य के इंजन के रूप में स्थापित कर रहे हैं। श्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा किया गया यह आह्वान न केवल निवेश को आकर्षित करता है, बल्कि एक नए, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत की नींव को भी मज़बूत करता है।
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