आयोवा में डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार पर बड़ा सवाल: जोश तुरेक ने 2026 में करीब 60% विधायी वोट किए मिस, 20 हजार डॉलर से ज्यादा का पर-डायम भी लिया

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वॉशिंगटन/डेस मोइनेस। अमेरिका में 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले आयोवा की सीनेट सीट पर राजनीतिक मुकाबला लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोश तुरेक (Josh Turek) को लेकर एक रिपोर्ट ने चुनावी बहस को नया मुद्दा दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोवा स्टेट हाउस के सदस्य रहे तुरेक ने 12 जनवरी से 3 मई 2026 के बीच सदन के 261 वोट मिस किए, जो उस अवधि में हुए उनके कुल वोटों का लगभग 60 प्रतिशत बताया गया है। इसी दौरान उन्हें विधायकों के लिए मिलने वाला 20,100 डॉलर का पर-डायम भुगतान भी मिला।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि तुरेक अब आयोवा से अमेरिकी सीनेट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हैं और नवंबर के चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार एश्ले हिंसन को चुनौती देंगे। ऐसे में उनके विधायी रिकॉर्ड और सदन में उपस्थिति को लेकर सवाल अब सीधे सीनेट चुनाव की राजनीति का हिस्सा बन गए हैं।

261 वोट मिस करने का मामला क्या है?

Fox News की रिपोर्ट के अनुसार, तुरेक ने 12 जनवरी से 3 मई 2026 के बीच आयोवा हाउस के 261 वोटों में हिस्सा नहीं लिया। रिपोर्ट में इसे उनके उस अवधि के लगभग 60 प्रतिशत वोटों के बराबर बताया गया है। इस दौरान कुछ अनुपस्थितियां ऐसे समय पर हुईं जब तुरेक अपने सीनेट अभियान के लिए आयोवा से बाहर राजनीतिक और फंडरेजिंग गतिविधियों में शामिल थे।

आलोचकों का तर्क है कि जब कोई व्यक्ति मौजूदा विधायी पद पर रहते हुए उसी समय किसी बड़े चुनाव की तैयारी कर रहा हो, तो उसके सामने दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होती है। तुरेक के मामले में विपक्ष इसी सवाल को चुनावी मुद्दा बना रहा है कि क्या एक संभावित अमेरिकी सीनेटर को पहले अपने मौजूदा विधायी दायित्वों को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए।

हालांकि, केवल अनुपस्थित वोटों की संख्या से किसी विधायक के पूरे काम का आकलन करना भी उचित नहीं होगा। विधायक का काम केवल सदन में वोट देना नहीं होता। समिति का काम, मतदाताओं से संपर्क, विधेयकों पर बातचीत और अन्य राजनीतिक गतिविधियां भी विधायी भूमिका का हिस्सा होती हैं। इसलिए इस रिकॉर्ड को उसके व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।

20 हजार डॉलर से ज्यादा के पर-डायम ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

विवाद का दूसरा बड़ा पहलू पर-डायम भुगतान है। रिपोर्टों के मुताबिक, आयोवा हाउस के मुख्य क्लर्क ने पुष्टि की कि तुरेक को इस अवधि में कुल 20,100 डॉलर का पर-डायम मिला। Iowa legislators के लिए दैनिक पर-डायम की दर 201 डॉलर बताई गई है।

रिपब्लिकन खेमे ने इसी बिंदु को पकड़ते हुए आरोप लगाया कि एक ओर तुरेक बड़ी संख्या में वोटों से अनुपस्थित रहे और दूसरी ओर उन्होंने विधायी कार्य से जुड़े पर-डायम भुगतान प्राप्त किए। इससे यह सवाल उठाया जा रहा है कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए अनुपस्थिति और भत्ते के बीच क्या उचित संतुलन था।

हालांकि, पर-डायम को सीधे वेतन या किसी गैरकानूनी भुगतान के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे विधायकों को काम से जुड़े खर्चों के लिए मिलने वाला भुगतान बताया गया है। विवाद मुख्य रूप से इस बात पर है कि इसे प्राप्त करने वाले विधायक की विधायी उपस्थिति कितनी रही।

किन मुद्दों पर नहीं हुआ मतदान?

रिपोर्ट के अनुसार तुरेक की कुछ अनुपस्थितियां महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों से जुड़ी थीं। इनमें ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा लाइसेंसिंग से संबंधित प्रस्ताव तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

Ashley Hinson के अभियान ने इसके अलावा आयोवा डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स की फंडिंग और Iowa Farm Bill जैसे मुद्दों पर भी तुरेक की अनुपस्थिति को चुनावी बहस में उठाया है। हालांकि, इन दावों को मुख्यतः Hinson अभियान के राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।

यही वजह है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा केवल “कितने वोट मिस किए गए” तक सीमित नहीं रहने वाला है। सवाल यह भी होगा कि जिन वोटों में उम्मीदवार मौजूद नहीं थे, वे किन परिस्थितियों में हुए और उनकी अनुपस्थिति का वास्तविक विधायी प्रभाव क्या पड़ा।

अभियान और विधायी जिम्मेदारी के बीच टकराव

तुरेक की स्थिति को समझने के लिए 2026 के आयोवा सीनेट चुनाव का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। रिपब्लिकन सीनेटर जोनी अर्न्स्ट के सीट छोड़ने के बाद यह सीट दोनों पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। डेमोक्रेट इस सीट को लंबे समय से रिपब्लिकन नियंत्रण वाले राज्य में अपने लिए बड़ा अवसर मान रहे हैं। AP के अनुसार, तुरेक और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जैक वॉल्स के बीच मुकाबला डेमोक्रेटिक प्राथमिक चुनाव का प्रमुख आकर्षण था।

तुरेक की राजनीतिक पहचान भी सामान्य उम्मीदवारों से अलग रही है। वह दो बार पैरालंपिक स्वर्ण पदक जीत चुके व्हीलचेयर बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं और उनकी व्यक्तिगत कहानी उनके राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

लेकिन अब विपक्ष उनके खेल और व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय उनके विधायी रिकॉर्ड पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यही चुनावी राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा है—जब कोई उम्मीदवार बड़े पद के लिए मैदान में उतरता है, तो उसके पिछले सार्वजनिक रिकॉर्ड की जांच भी उतनी ही कड़ी हो जाती है।

रिपब्लिकन उम्मीदवार हिंसन ने साधा निशाना

रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार एश्ले हिंसन ने तुरेक की अनुपस्थिति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उन्हें “absentee legislator” यानी अनुपस्थित रहने वाला विधायक बताया और कहा कि उन्होंने 20 हजार डॉलर से ज्यादा पर-डायम लिया, जबकि बड़ी संख्या में वोटों में हिस्सा नहीं लिया।

हिंसन के अभियान ने इस मुद्दे को अपने चुनावी संदेश का हिस्सा बनाते हुए सवाल उठाया है कि यदि तुरेक आयोवा स्टेट हाउस की जिम्मेदारी के दौरान पर्याप्त उपस्थिति नहीं दिखा सके, तो अमेरिकी सीनेट में उनसे क्या उम्मीद की जानी चाहिए।

यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नवंबर का मुकाबला व्यक्तिगत रिकॉर्ड और नेतृत्व क्षमता पर केंद्रित हो सकता है। ऐसे में उम्मीदवारों के पुराने वोटिंग रिकॉर्ड, फंडरेजिंग गतिविधियां और सार्वजनिक पद पर प्रदर्शन मतदाताओं के लिए निर्णायक मुद्दे बन सकते हैं।

तुरेक के अभियान ने क्या जवाब दिया?

तुरेक के अभियान ने इन आरोपों को एकतरफा तरीके से स्वीकार नहीं किया। उनके प्रवक्ता ने Hinson की अपनी विधायी अनुपस्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि रिपब्लिकन उम्मीदवार भी एक वार्षिक रक्षा फंडिंग विधेयक के मतदान में अनुपस्थित रही थीं, जबकि वह वॉशिंगटन में एक फंडरेजर में शामिल थीं। अभियान ने तुरेक को आयोवा के अधिक द्विदलीय और प्रभावी विधायकों में से एक बताया।

इस जवाब से साफ है कि दोनों पक्ष अब उपस्थिति के मुद्दे को व्यापक राजनीतिक तुलना में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। यानी सवाल सिर्फ यह नहीं रहेगा कि किस उम्मीदवार ने कितने वोट मिस किए, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि अनुपस्थिति की परिस्थितियां क्या थीं और पूरे विधायी कार्यकाल में दोनों नेताओं का प्रदर्शन कैसा रहा।

ट्रंप की राजनीति और आयोवा का चुनावी माहौल

इस विवाद को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आयोवा पिछले कुछ वर्षों में रिपब्लिकन राजनीति के लिए महत्वपूर्ण राज्य बन चुका है और 2026 का सीनेट चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों दलों की नजर में है।

रिपब्लिकन रणनीतिकार तुरेक की अनुपस्थिति को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट इसे चुनावी राजनीति में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया हमला बता सकते हैं। इस तरह एक स्थानीय विधायी रिकॉर्ड अब राष्ट्रीय राजनीतिक संदेश का हिस्सा बन गया है।

क्या यह मुद्दा चुनाव का रुख बदल सकता है?

किसी एक मुद्दे के आधार पर चुनाव का परिणाम तय करना मुश्किल है। आयोवा में मतदाताओं के लिए अर्थव्यवस्था, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीण समुदाय, महंगाई, सामाजिक मुद्दे और संघीय सरकार की नीतियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

फिर भी, उम्मीदवार की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी का सवाल किसी भी चुनाव में महत्वपूर्ण होता है। यदि मतदाताओं को लगता है कि कोई उम्मीदवार अपने वर्तमान पद की जिम्मेदारियों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देता, तो इसका राजनीतिक नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, यदि उम्मीदवार अपनी अनुपस्थिति के लिए ठोस कारण और अपने व्यापक विधायी काम का रिकॉर्ड सामने रख देता है, तो वही मुद्दा उतना प्रभावी नहीं रह सकता।

निष्कर्ष

आयोवा के 2026 सीनेट चुनाव में जोश तुरेक के खिलाफ उठे 261 मिस्ड वोट और 20,100 डॉलर के पर-डायम से जुड़े सवालों ने चुनावी मुकाबले को और तीखा कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के बीच उनकी अनुपस्थिति लगभग 60 प्रतिशत वोटों तक पहुंची। रिपब्लिकन उम्मीदवार एश्ले हिंसन इस रिकॉर्ड को नेतृत्व और जिम्मेदारी के सवाल से जोड़ रही हैं, जबकि तुरेक का अभियान उनके राजनीतिक काम और द्विदलीय रिकॉर्ड को सामने रखकर पलटवार कर रहा है।

आखिरकार, आयोवा के मतदाता यह तय करेंगे कि यह रिकॉर्ड उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है। चुनावी मैदान में एक ओर तुरेक की पैरालंपिक उपलब्धियां, राजनीतिक पहचान और ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति है, तो दूसरी ओर उनकी विधायी उपस्थिति को लेकर उठे गंभीर सवाल हैं। नवंबर तक दोनों पक्ष इस मुद्दे को अपने-अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश करेंगे।

नोट: “करीब 60 प्रतिशत वोट मिस” और पर-डायम से संबंधित आंकड़े मुख्यतः Fox News की रिपोर्ट तथा उससे संबंधित रिपब्लिकन राजनीतिक संगठनों के प्रकाशित दावों पर आधारित हैं; तुरेक अभियान ने इन आरोपों का प्रतिवाद किया है। इसलिए इन्हें चुनावी आरोप और प्रत्यारोप के संदर्भ में पढ़ना उचित है।

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