फ़रवरी 12, 2026

G7 2025 शिखर सम्मेलन: विकसित देशों का साझा संकल्प जलवायु, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर

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Anoop singh

साल 2025 का G7 शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति और आर्थिक परिदृश्य में एक निर्णायक क्षण साबित हुआ। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित बैठक कनाडा के टोरंटो शहर में आयोजित की गई, जहां विश्व की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं — अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान और कनाडा — के नेताओं ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य था तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में साझा चुनौतियों का समाधान ढूंढ़ना और वैश्विक विकास के लिए सामूहिक दिशा तय करना।

जलवायु परिवर्तन पर ठोस संकल्प

G7 देशों ने जलवायु संकट को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा। सभी सदस्य देशों ने कार्बन उत्सर्जन में 2035 तक 60% कटौती का लक्ष्य निर्धारित किया और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही, विकासशील देशों को जलवायु अनुकूलन और हरित प्रौद्योगिकी में सहायता देने के लिए 150 अरब डॉलर के नए फंड की घोषणा की गई। सम्मेलन में यह भी तय हुआ कि 2040 तक कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।

वैश्विक सुरक्षा और शांति का एजेंडा

सम्मेलन में यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया में अशांति और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। सदस्य देशों ने एक साझा सुरक्षा रणनीति पर सहमति जताई, जिसमें साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने, आतंकवाद के वित्तपोषण पर नकेल कसने और रणनीतिक जलमार्गों की सुरक्षा बढ़ाने के उपाय शामिल हैं। इस मौके पर एक वैश्विक शांति मिशन के लिए संयुक्त टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की गई।

अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास की दिशा में कदम

G7 देशों ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से निपटने के लिए एकजुट होकर काम करने का निश्चय किया। सम्मेलन में डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नियमन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों में सुधार जैसे मुद्दों पर सहमति बनी। सदस्य देशों ने विकासशील और गरीब देशों को सस्ती वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग देने पर भी बल दिया ताकि वैश्विक असमानताओं को कम किया जा सके।

सम्मेलन का महत्व

G7 2025 शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए विकसित देशों का सहयोग अनिवार्य है। इस बैठक के निर्णय आने वाले वर्षों में न केवल सदस्य देशों, बल्कि पूरी दुनिया की दिशा तय करेंगे। सम्मेलन ने जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे अहम मोर्चों पर सामूहिक नेतृत्व की जरूरत को फिर से रेखांकित किया।


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