प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कनाडा आगमन: G7 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनने का संकल्प

कैलगरी (कनाडा), 17 जून 2025 – भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कनाडा के कैलगरी शहर पहुँचे, जहाँ वे G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इस सम्मेलन में उनकी उपस्थिति न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है, बल्कि विकासशील देशों की चिंताओं को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों तक पहुँचाने की उनकी प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में विशेष आधिकारिक समारोह आयोजित किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की भागीदारी को कितनी अहमियत दी जा रही है। अपने आगमन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“मैं कैलगरी पहुँच चुका हूँ G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए। वैश्विक नेताओं के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा की आशा है। मैं ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को रेखांकित करूंगा।”
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य उन मुद्दों को उजागर करना है जो विकासशील और निम्न-आय वाले देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक असमानता, तकनीकी समानता और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचनाओं में सुधार जैसे विषय उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि निर्णय प्रक्रिया में सभी देशों की आवाज़ को समान रूप से महत्व मिले।
G7 और भारत की कूटनीतिक रणनीति
यह शिखर सम्मेलन भारत के उस रुख को भी मजबूती देता है, जिसे उसने अपने हालिया G20 अध्यक्षता के दौरान दर्शाया था — “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास”। G7 जैसे मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी से यह संदेश जाता है कि भारत न केवल अपनी प्रगति पर केंद्रित है, बल्कि वह दुनिया भर के उन देशों के लिए भी आवाज़ उठा रहा है जिन्हें अक्सर वैश्विक नीतियों में अनदेखा कर दिया जाता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज़
प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य वैश्विक दक्षिण यानी अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों की चिंताओं को विश्व मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करना है। उनका जोर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, जलवायु वित्त, तकनीक हस्तांतरण और आर्थिक नीति में न्यायसंगत व्यवस्था लागू हो ताकि सभी देशों को बराबरी का अवसर मिल सके।
निष्कर्ष
G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी एक संकेत है कि वैश्विक शक्ति-संतुलन बदल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति न केवल भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब ग्लोबल साउथ की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत किस तरह से G7 देशों के साथ मिलकर समावेशी और संतुलित वैश्विक विकास की दिशा तय करता है।
