विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस: भारत का “सिकल सेल-मुक्त भविष्य” की ओर निर्णायक कदम

19 जून, विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस, न केवल वैश्विक स्तर पर सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने का दिन है, बल्कि यह उस प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है जो भारत ने इस गंभीर आनुवंशिक बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए दिखाई है। भारत सरकार, विशेष रूप से स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, “राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन” के ज़रिए इस दिशा में साहसिक और रणनीतिक कदम उठा रही है।
सिकल सेल एनीमिया: एक अदृश्य चुनौती
सिकल सेल एनीमिया एक वंशानुगत रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कण सामान्य गोल आकार की बजाय अर्धचंद्र या हंसिया आकार के हो जाते हैं। इससे रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है और शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है। यह रोग मुख्यतः जनजातीय समुदायों में अधिक पाया जाता है, विशेषकर मध्य भारत, पूर्वोत्तर राज्यों, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में।
राष्ट्रीय मिशन: आशा की एक नई किरण
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2023 में लॉन्च किया गया, का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को पूरी तरह सिकल सेल मुक्त बनाना है। इस मिशन की नींव दो प्रमुख स्तंभों पर टिकी है:
- व्यापक स्क्रीनिंग अभियान:
लाखों लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि समय रहते सिकल सेल ट्रेट और रोग से ग्रसित व्यक्तियों की पहचान की जा सके। इससे न केवल उचित उपचार की शुरुआत होती है, बल्कि प्रसव पूर्व परामर्श और पारिवारिक योजना में भी मदद मिलती है। - सशक्त जागरूकता कार्यक्रम:
सिकल सेल से जुड़ी भ्रांतियों और कलंक को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही है। स्कूलों, पंचायतों, स्वास्थ्य शिविरों और जनजातीय क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे आमजन इस रोग की पहचान, लक्षण और रोकथाम के उपायों से भलीभांति परिचित हो सकें।
समुदाय की भागीदारी: परिवर्तन की चाबी
सरकार का मानना है कि केवल नीतियाँ और कार्यक्रम ही पर्याप्त नहीं हैं, जब तक कि स्थानीय समुदाय स्वयं जागरूक होकर इसमें भागीदार न बनें। इसलिए मिशन में ऐसे कार्यक्रम शामिल किए गए हैं जो जनजातीय युवाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें बदलाव के अग्रदूत बना रहे हैं।
तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय
मिशन में आधुनिक तकनीक का भी उपयोग हो रहा है। मोबाइल ऐप्स, हेल्थ पोर्टल्स और डिजिटल हेल्थ कार्ड्स के माध्यम से डेटा संग्रहण, निगरानी और मरीजों की फॉलो-अप प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है। इससे रोग प्रबंधन में पारदर्शिता और कुशलता दोनों बढ़ी है।
निष्कर्ष: एक स्वस्थ और सशक्त भारत की ओर
विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस पर भारत का यह संकल्प – एक सिकल सेल-मुक्त राष्ट्र – केवल एक चिकित्सा लक्ष्य नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य समानता और मानव गरिमा की दिशा में एक प्रेरणादायक यात्रा है। यह मिशन बताता है कि जब नीति, जागरूकता और सहभागिता साथ मिलती है, तो असंभव भी संभव हो सकता है।
SickleCellFreeIndia और #SickleCellAwareness जैसे हैशटैग इस प्रयास को सामाजिक आंदोलन का रूप देने में सहायक बन रहे हैं।
भारत का यह संकल्प है – हर जीवन स्वस्थ हो, हर भविष्य सुरक्षित हो।
