फ़रवरी 13, 2026

ग्राम पंचायत जंगल दीलन सिंह के विद्यालय को मर्ज न करने की मांग: एक जनहित में उठी आवाज

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Anoop singh

19 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजे गए एक पत्र में ग्राम पंचायत जंगल दीलन सिंह के ग्राम प्रधान द्वारा गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। यह पत्र, जनपद गोरखपुर के विकास खंड पिपराइच के अंतर्गत स्थित प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को लेकर लिखा गया है, जिसमें उच्च प्राथमिक विद्यालय को किसी अन्य ग्राम पंचायत में मर्ज न करने की अपील की गई है।

📜 पत्र का सारांश:

ग्राम प्रधान ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उनके ग्राम पंचायत में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय जंगल दीलन सिंह को किसी अन्य ग्राम पंचायत के विद्यालय में मर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्णय, शिक्षा अधिकारियों के निर्देश पर लिया गया था, जो कि स्थानीय स्थिति और जनहित को ध्यान में रखे बिना किया गया प्रतीत होता है।

📌 ग्राम प्रधान की आपत्ति के मुख्य बिंदु:

  1. विद्यालय की दूरी – ग्राम पंचायत से जुड़ने वाले अन्य विद्यालय (जैसे UPS डुड़उर एवं UPS बरिया) लगभग 4 किमी दूर स्थित हैं। इतनी दूरी पर छोटे बच्चों का पैदल जाना अत्यंत कठिन है।
  2. सड़क की स्थिति – उक्त स्थानों तक पहुंचने वाले सड़क मार्ग की हालत दयनीय है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। वर्षा ऋतु में यह स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
  3. गरीब परिवारों पर असर – स्थानीय निवासी अधिकतर गरीब परिवारों से हैं, जो अपने बच्चों को इतनी दूर विद्यालय भेजने की स्थिति में नहीं हैं। इससे उनके बच्चों की पढ़ाई बाधित हो सकती है।

🙏 मांग:

ग्राम प्रधान ने मुख्यमंत्री से सादर निवेदन किया है कि ग्राम पंचायत जंगल दीलन सिंह के उच्च प्राथमिक विद्यालय को किसी अन्य पंचायत में मर्ज न किया जाए और इसे यथावत रखा जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा में कोई व्यवधान न आए।

🗣️ जन भावना की गूंज:

इस पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रतिनिधि, जैसे ग्राम प्रधान, अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं और ग्रामीणों के हितों के लिए आगे आ रहे हैं। यह कदम निश्चित रूप से एक प्रेरणा है कि हर गांव के लोग अपने क्षेत्र के लिए आवाज उठाएं और सरकार तक अपनी समस्याएं व मांगें पहुंचाएं।

निष्कर्ष:

ग्राम पंचायतों के विद्यालय ग्रामीण शिक्षा की रीढ़ हैं। ऐसे में इन्हें मर्ज करने जैसे निर्णयों को लेते समय ज़मीनी हालात का गंभीरता से मूल्यांकन आवश्यक है। ग्राम प्रधान द्वारा उठाई गई इस मांग को जनहित में विचार योग्य माना जाना चाहिए, ताकि शिक्षा सबके लिए सुलभ बनी रहे।


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