मध्य पूर्व संकट के बीच भी भारतीय शेयर बाजार में उछाल: निवेशकों का आत्मविश्वास बना हुआ

मुंबई, 20 जून 2025
मध्य पूर्व में इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों ने एक बार फिर अपने लचीलापन और स्थिरता का प्रदर्शन किया है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी निवेशकों का भरोसा कायम रहा, जिसके चलते शुक्रवार को बाजार हरे निशान पर खुले।
तेजी की मजबूत शुरुआत
कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 237.77 अंकों की तेजी के साथ 81,599.63 पर खुला, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 77.55 अंक बढ़कर 24,870.80 पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों ने अंतरराष्ट्रीय तनावों की तुलना में भारत की आर्थिक स्थिरता को अधिक तवज्जो दी।
घरेलू कारकों की भूमिका
शेयर बाजार की इस मजबूती के पीछे कई घरेलू कारक भी जिम्मेदार हैं:
- मजबूत आर्थिक संकेतक: हाल ही में जारी खुदरा और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े सकारात्मक रहे हैं, जिससे बाजार में भरोसा लौटा है।
- एफआईआई और डीआईआई का समर्थन: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने हाल के दिनों में लगातार खरीदारी की है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भी बाजार में सक्रिय रहे।
- मौद्रिक नीति में स्थिरता: भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने से व्यापारिक माहौल को मजबूती मिली है।
वैश्विक जोखिमों की अनदेखी?
भले ही इज़राइल-ईरान संघर्ष, तेल आपूर्ति की अनिश्चितता और अमेरिकी डॉलर की मजबूती जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे छाए हुए हों, लेकिन भारतीय निवेशकों ने इन्हें फिलहाल नज़रअंदाज़ किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो उसका असर कच्चे तेल की कीमतों और रुपये पर जरूर पड़ेगा, जो अंततः बाजार को प्रभावित कर सकता है।
कौन-से सेक्टर रहे अग्रणी?
- आईटी और बैंकिंग सेक्टर में सबसे अधिक तेजी देखी गई।
- ऊर्जा और ऑटो सेक्टर में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
- फार्मा और मेटल सेक्टर ने मिश्रित प्रदर्शन किया।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार में दीर्घकालिक निवेशकों का भरोसा बरकरार है। हालांकि लघु अवधि में वैश्विक घटनाएं उतार-चढ़ाव ला सकती हैं, लेकिन घरेलू आर्थिक सुधार, सरकार की नीतिगत स्थिरता और कॉर्पोरेट आय में वृद्धि बाजार को सहारा देती रहेगी।
निष्कर्ष:
जहाँ एक ओर विश्व भर में भू-राजनीतिक अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं भारत के शेयर बाजारों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मजबूत आर्थिक आधार और जागरूक निवेशक भावना किसी भी बाहरी दबाव को सहने की क्षमता रखते हैं।
