फ्रांस ने कतर पर कथित ईरानी हमलों के बाद जताया पूर्ण समर्थन: खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर

24 जून 2025
ईरान द्वारा कथित रूप से कतर की भूमि पर मिसाइल हमले किए जाने के बाद फ्रांस ने तुरंत और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कतर के प्रति पूर्ण समर्थन की घोषणा की है। मैक्रों का यह बयान न केवल अंग्रेज़ी, बल्कि अरबी और फ्रेंच में भी दिया गया, जिससे उनकी कूटनीतिक गंभीरता और संदेश की वैश्विक पहुंच दोनों स्पष्ट होती है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैंने अपने मित्र शेख तमीम, कतर के अमीर से बात की। मैंने उन्हें अपनी पूर्ण एकजुटता और उनकी भूमि पर हुए ईरानी हमलों की स्पष्ट निंदा प्रकट की। फ्रांस खाड़ी क्षेत्र के हर साझेदार के साथ खड़ा है।”
उन्होंने इस कथित हमले को कतर की संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया और कहा कि फ्रांस कतर और अन्य खाड़ी देशों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी और सामंजस्य बनाए रखेगा। उन्होंने सभी पक्षों से “अत्यधिक संयम” बरतने की भी अपील की, जिससे यह संकेत मिलता है कि फ्रांस तनाव को और भड़काने की बजाय शांति बहाल करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
फ्रांस की यह प्रतिक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?
रणनीतिक हित: फ्रांस के खाड़ी देशों के साथ गहरे रक्षा और आर्थिक संबंध हैं। कतर में फ्रांस की सैन्य मौजूदगी भी है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा और तकनीकी साझेदारी मजबूत है।
कूटनीतिक संकेत: फ्रांस ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब खाड़ी क्षेत्र में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह बयान वैश्विक शक्तियों को स्पष्ट संकेत देता है कि फ्रांस क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर है।
ईरान की चुप्पी: ईरान की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, फ्रांस की कड़ी प्रतिक्रिया ने कतर की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती प्रदान की है।
संभावित वैश्विक असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना खाड़ी क्षेत्र में नई भू-राजनीतिक खींचतान की शुरुआत हो सकती है। पहले ही अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की प्रतिक्रिया आ चुकी है। ऐसे में फ्रांस का यह कड़ा रुख यूरोपीय यूनियन की अगली नीति को भी प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष
ईरान-कतर तनाव पर फ्रांस की सक्रियता यह दर्शाती है कि यूरोप अब खाड़ी क्षेत्र की घटनाओं को केवल दूर से देखने का पक्षधर नहीं रह गया है। यह घटनाक्रम इस बात की भी पुष्टि करता है कि कतर अब एक रणनीतिक रूप से अहम खिलाड़ी बन चुका है, जिसकी सुरक्षा को लेकर पश्चिमी शक्तियां सजग हैं।
