फ़रवरी 12, 2026

अंतर्राष्ट्रीय महिला कूटनीति दिवस 2025: वैश्विक नेतृत्व में महिलाओं की भूमिका को सम्मान

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Anoop singh

24 जून 2025

हर वर्ष 24 जून को अंतर्राष्ट्रीय महिला कूटनीति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने के लिए समर्पित है जो वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने और विदेशी नीतियों को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी, ताकि विश्वभर में महिलाओं को कूटनीतिक नेतृत्व में समान अवसर दिलाने के प्रयासों को बढ़ावा मिल सके।

इतिहास और पृष्ठभूमि

कूटनीति का क्षेत्र लंबे समय तक पुरुषों का गढ़ बना रहा है। महिलाओं को दशकों तक अंतर्राष्ट्रीय वार्ताओं और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से अलग रखा गया। हालांकि, एलेक्ज़ेंड्रा कोलोन्टई जैसी अग्रणी महिलाओं ने 20वीं सदी की शुरुआत में राजदूत बनकर इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया, लेकिन अब भी शीर्ष कूटनीतिक पदों पर महिलाओं की भागीदारी सीमित है।

महिलाओं की भूमिका: समावेशिता और स्थायित्व की दिशा में

अनुसंधानों से यह स्पष्ट हुआ है कि जब महिलाएं कूटनीतिक वार्ताओं में भाग लेती हैं, तो परिणाम अधिक समावेशी और दीर्घकालिक होते हैं। महिलाएं संवाद स्थापित करने, सहमति बनाने और विविध दृष्टिकोणों को शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनका दृष्टिकोण शांति प्रक्रिया, विकास और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने में सहायक होता है।

यह केवल उत्सव नहीं, एक आह्वान भी है

यह दिवस सिर्फ उत्सव का नहीं, बल्कि एक वैश्विक आह्वान भी है — ताकि सरकारें, संगठन और संस्थाएं कूटनीति में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करें, लिंग-आधारित असमानताओं को समाप्त करें और महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करें। महिलाओं को विदेश नीति और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करना केवल समानता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अधिक स्थिर, सहयोगात्मक और न्यायपूर्ण विश्व की आवश्यकता भी है।

निष्कर्ष

जब महिलाएं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज़ बुलंद करती हैं, तो न केवल नीति निर्माण बेहतर होता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए समावेशी और शांतिपूर्ण भविष्य का रास्ता भी प्रशस्त करता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला कूटनीति दिवस 2025, एक ऐसा अवसर है जब हम यह संकल्प लें कि दुनिया की आधी आबादी को वैश्विक निर्णयों में पूरा प्रतिनिधित्व और सम्मान मिलना चाहिए।


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