ग्यारहवीं शरीफ पर जालौन में निकला जुलूस-ए-गौसिया, अमन और भाईचारे का दिया संदेश

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर गुरुवार को जालौन नगर में जुलूस-ए-गौसिया अकीदत और धार्मिक भावना के साथ निकाला गया। सुबह से ही आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह दिखाई दिया। निर्धारित कार्यक्रम के तहत तकिया मैदान से जुलूस की शुरुआत हुई, जो नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए वापस तकिया पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे और रास्ते में स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

जुलूस की शुरुआत सुबह करीब नौ बजे तकिया मैदान से हुई। धार्मिक वातावरण के बीच जुलूस आगे बढ़ा। इसमें शामिल लोग नात और कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे। जुलूस के आगे बढ़ने के साथ नगर के विभिन्न हिस्सों में लोगों की मौजूदगी बढ़ती गई। कई स्थानों पर नागरिकों ने जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया और उनके लिए पानी समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कीं।

तकिया मैदान से निकलने के बाद जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर झंडा चौराहा पहुंचा। यहां से जुलूस बस स्टैंड की दिशा में आगे बढ़ा। इसके बाद पानी की टंकी के रास्ते फुटकर सब्जी मंडी की ओर गया। जुलूस बंबई वाला मंदिर मार्ग से होते हुए नत्थू तिराहा पहुंचा। निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए जुलूस पुनः तकिया पहुंचा, जहां आयोजन का समापन किया गया।

पूरे मार्ग में धार्मिक अनुशासन और आपसी सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव का विशेष ध्यान रखा गया। विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों की ओर से पानी की व्यवस्था की गई। इससे जुलूस में शामिल लोगों को सुविधा मिली और आयोजन में स्थानीय सहभागिता भी दिखाई दी।

गौस-ए-आजम की याद में मनाई जाती है ग्यारहवीं शरीफ

शहर काजी मौलाना साबिर ने बताया कि ग्यारहवीं शरीफ हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी, जिन्हें गौस-ए-आजम के नाम से भी जाना जाता है, की याद में मनाई जाती है। इसी अवसर पर जुलूस-ए-गौसिया का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक स्मरण के साथ लोगों को नेक रास्ते पर चलने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में भाईचारा कायम रखने का संदेश देना भी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इनके माध्यम से समाज में अच्छे आचरण और मानव सेवा की भावना को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। जरूरतमंद लोगों की मदद करना, पड़ोसियों के सुख-दुख में साथ खड़ा होना और समाज में आपसी सम्मान बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

अमन और सौहार्द का संदेश

कार्यक्रम के दौरान आमिर अत्तारी ने कहा कि समाज में शांति, अमन और सौहार्द बनाए रखना सभी लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती आपसी सहयोग और विश्वास से बनती है। यदि लोग एक-दूसरे की परेशानियों को समझें और जरूरत के समय सहायता के लिए आगे आएं तो सामाजिक संबंध और मजबूत होते हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक अवसर लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे को प्राथमिकता देने से समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

घरों और दरगाहों पर हुए धार्मिक आयोजन

ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर जालौन नगर के विभिन्न घरों और दरगाहों पर भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने फातिहा, कुरानख्वानी और नजर-नियाज का आयोजन किया। परिवारों ने अपने स्तर पर धार्मिक रस्में पूरी कीं और देश, समाज तथा परिवारों की खुशहाली की दुआ की।

कई स्थानों पर लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंदों की सहायता और लोगों के बीच प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखने की भावना भी दिखाई दी।

नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

जुलूस के दौरान नगरवासियों की सहभागिता भी देखने को मिली। निर्धारित मार्ग पर लोग जुलूस को देखने के लिए मौजूद रहे। विभिन्न स्थानों पर स्वागत की व्यवस्था की गई। गर्मी और लंबे मार्ग को देखते हुए कई जगह पानी उपलब्ध कराया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने भी अनुशासन के साथ जुलूस में भाग लिया।

जुलूस के दौरान नात और कलाम की आवाज से वातावरण धार्मिक रंग में नजर आया। विभिन्न मोहल्लों और बाजार क्षेत्रों से गुजरते हुए जुलूस जब प्रमुख स्थानों पर पहुंचा तो स्थानीय लोगों ने उसका स्वागत किया। आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और आपसी सहयोग का संदेश भी सामने आया।

सामाजिक एकता पर दिया जोर

ग्यारहवीं शरीफ के इस आयोजन में वक्ताओं ने लोगों से समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में रहने वाले सभी लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

आयोजकों और धार्मिक पदाधिकारियों ने लोगों से नेक कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि धार्मिक शिक्षाओं का वास्तविक उद्देश्य इंसान को बेहतर आचरण और मानव सेवा की ओर प्रेरित करना है। इसी भावना के साथ ग्यारहवीं शरीफ का आयोजन लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश का अवसर भी बना।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

जुलूस-ए-गौसिया के दौरान हाफिज मुन्ना, रफीक हाफिज, जाकिर सिद्दीकी, जर्रार कादरी, जीलानी, इमाम शहीद, वलीउल्लाह सूफी, हाफिज बिलाल, जफर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। आयोजन के दौरान लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की और जुलूस को निर्धारित मार्ग से शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया।

ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर जालौन नगर में आयोजित यह जुलूस धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और भाईचारे के संदेश के साथ संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में लोगों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना दिखाई। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ जरूरतमंदों की मदद, अमन कायम रखने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की अपील ने आयोजन को व्यापक सामाजिक संदेश से भी जोड़ा।

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ग्यारहवीं शरीफ पर जालौन में निकला जुलूस-ए-गौसिया, अमन और भाईचारे का दिया संदेश

लेखक:Editor Anoop Singh | प्रकाशित:सितम्बर 25, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर गुरुवार को जालौन नगर में जुलूस-ए-गौसिया अकीदत और धार्मिक भावना के साथ निकाला गया। सुबह से ही आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह दिखाई दिया। निर्धारित कार्यक्रम के तहत तकिया मैदान से जुलूस की शुरुआत हुई, जो नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए वापस तकिया पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे और रास्ते में स्थानीय नागरिकों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

जुलूस की शुरुआत सुबह करीब नौ बजे तकिया मैदान से हुई। धार्मिक वातावरण के बीच जुलूस आगे बढ़ा। इसमें शामिल लोग नात और कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे। जुलूस के आगे बढ़ने के साथ नगर के विभिन्न हिस्सों में लोगों की मौजूदगी बढ़ती गई। कई स्थानों पर नागरिकों ने जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया और उनके लिए पानी समेत अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कीं।

तकिया मैदान से निकलने के बाद जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होकर झंडा चौराहा पहुंचा। यहां से जुलूस बस स्टैंड की दिशा में आगे बढ़ा। इसके बाद पानी की टंकी के रास्ते फुटकर सब्जी मंडी की ओर गया। जुलूस बंबई वाला मंदिर मार्ग से होते हुए नत्थू तिराहा पहुंचा। निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए जुलूस पुनः तकिया पहुंचा, जहां आयोजन का समापन किया गया।

पूरे मार्ग में धार्मिक अनुशासन और आपसी सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव का विशेष ध्यान रखा गया। विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों की ओर से पानी की व्यवस्था की गई। इससे जुलूस में शामिल लोगों को सुविधा मिली और आयोजन में स्थानीय सहभागिता भी दिखाई दी।

गौस-ए-आजम की याद में मनाई जाती है ग्यारहवीं शरीफ

शहर काजी मौलाना साबिर ने बताया कि ग्यारहवीं शरीफ हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी, जिन्हें गौस-ए-आजम के नाम से भी जाना जाता है, की याद में मनाई जाती है। इसी अवसर पर जुलूस-ए-गौसिया का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक स्मरण के साथ लोगों को नेक रास्ते पर चलने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में भाईचारा कायम रखने का संदेश देना भी है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इनके माध्यम से समाज में अच्छे आचरण और मानव सेवा की भावना को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। जरूरतमंद लोगों की मदद करना, पड़ोसियों के सुख-दुख में साथ खड़ा होना और समाज में आपसी सम्मान बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

अमन और सौहार्द का संदेश

कार्यक्रम के दौरान आमिर अत्तारी ने कहा कि समाज में शांति, अमन और सौहार्द बनाए रखना सभी लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती आपसी सहयोग और विश्वास से बनती है। यदि लोग एक-दूसरे की परेशानियों को समझें और जरूरत के समय सहायता के लिए आगे आएं तो सामाजिक संबंध और मजबूत होते हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक अवसर लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं। आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता और भाईचारे को प्राथमिकता देने से समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

घरों और दरगाहों पर हुए धार्मिक आयोजन

ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर जालौन नगर के विभिन्न घरों और दरगाहों पर भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने फातिहा, कुरानख्वानी और नजर-नियाज का आयोजन किया। परिवारों ने अपने स्तर पर धार्मिक रस्में पूरी कीं और देश, समाज तथा परिवारों की खुशहाली की दुआ की।

कई स्थानों पर लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में धार्मिक आस्था के साथ जरूरतमंदों की सहायता और लोगों के बीच प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखने की भावना भी दिखाई दी।

नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

जुलूस के दौरान नगरवासियों की सहभागिता भी देखने को मिली। निर्धारित मार्ग पर लोग जुलूस को देखने के लिए मौजूद रहे। विभिन्न स्थानों पर स्वागत की व्यवस्था की गई। गर्मी और लंबे मार्ग को देखते हुए कई जगह पानी उपलब्ध कराया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने भी अनुशासन के साथ जुलूस में भाग लिया।

जुलूस के दौरान नात और कलाम की आवाज से वातावरण धार्मिक रंग में नजर आया। विभिन्न मोहल्लों और बाजार क्षेत्रों से गुजरते हुए जुलूस जब प्रमुख स्थानों पर पहुंचा तो स्थानीय लोगों ने उसका स्वागत किया। आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और आपसी सहयोग का संदेश भी सामने आया।

सामाजिक एकता पर दिया जोर

ग्यारहवीं शरीफ के इस आयोजन में वक्ताओं ने लोगों से समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में रहने वाले सभी लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और कठिन समय में उसके साथ खड़ा होना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

आयोजकों और धार्मिक पदाधिकारियों ने लोगों से नेक कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि धार्मिक शिक्षाओं का वास्तविक उद्देश्य इंसान को बेहतर आचरण और मानव सेवा की ओर प्रेरित करना है। इसी भावना के साथ ग्यारहवीं शरीफ का आयोजन लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश का अवसर भी बना।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

जुलूस-ए-गौसिया के दौरान हाफिज मुन्ना, रफीक हाफिज, जाकिर सिद्दीकी, जर्रार कादरी, जीलानी, इमाम शहीद, वलीउल्लाह सूफी, हाफिज बिलाल, जफर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। आयोजन के दौरान लोगों ने धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की और जुलूस को निर्धारित मार्ग से शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया।

ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर जालौन नगर में आयोजित यह जुलूस धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और भाईचारे के संदेश के साथ संपन्न हुआ। पूरे आयोजन में लोगों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना दिखाई। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ जरूरतमंदों की मदद, अमन कायम रखने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की अपील ने आयोजन को व्यापक सामाजिक संदेश से भी जोड़ा।