कानपुर देहात में बारिश का कहर: मजदूर का कच्चा मकान भरभराकर गिरा, परिवार ने भागकर बचाई जान
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर देहात। लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीण इलाकों में कमजोर और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कानपुर देहात के बीझौना गांव में गुरुवार रात तेज बारिश के बीच एक मजदूर का कच्चा मकान अचानक ढह गया। मकान गिरने के समय परिवार के सदस्य अंदर मौजूद थे, लेकिन आवाज और स्थिति को भांपते हुए उन्होंने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि मकान में रखा घरेलू सामान मलबे में दब जाने से परिवार को काफी नुकसान हुआ है।

मकान गिरने की घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने सबसे बड़ी समस्या रहने की हो गई है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और मजदूरी करके अपने जीवन का गुजारा करता है। ऐसे में अचानक सिर से छत छिन जाने के बाद परिवार के लिए आगे के दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
तेज बारिश के बीच अचानक ढह गया मकान
जानकारी के अनुसार, बीझौना गांव निवासी जमील मंसूरी अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहते हैं। गुरुवार रात क्षेत्र में तेज बारिश हुई। बारिश के दौरान मकान की हालत लगातार खराब होती गई और देखते ही देखते उसका एक हिस्सा कमजोर होकर गिरने लगा। मकान के ढहने की तेज आवाज से परिवार के लोग घबरा गए।
परिवार के सदस्यों ने बिना देर किए घर से बाहर निकलने में ही भलाई समझी। उनके बाहर निकलने के कुछ ही समय बाद मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया। समय रहते परिवार के बाहर निकल जाने के कारण एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
घटना के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर पहुंच गई। ग्रामीणों ने परिवार का हाल जाना और मलबे में दबे सामान को निकालने में मदद की। बारिश के कारण पहले से कमजोर मकान के अचानक गिरने से गांव में भी चिंता का माहौल बन गया।
मलबे में दब गया घरेलू सामान
मकान गिरने से परिवार का काफी सामान मलबे के नीचे दब गया। रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं के अलावा घर में रखा अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह नुकसान अतिरिक्त परेशानी लेकर आया है।
जमील मंसूरी मजदूरी कर अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। मजदूरी से मिलने वाली आमदनी से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल है। ऐसे में मकान के गिरने के बाद नया आशियाना तैयार करना उनके लिए आसान नहीं है।
परिवार के अनुसार, आर्थिक तंगी के चलते लंबे समय से पक्का मकान बनाना संभव नहीं हो सका। बारिश के मौसम में कच्चे मकान को लेकर पहले से चिंता बनी हुई थी, लेकिन रात में अचानक मकान गिरने से उनकी परेशानी और बढ़ गई।
एक ही मकान में रह रहे थे पांच भाई
पीड़ित परिवार का कहना है कि पांच भाई इसी मकान में रहकर अपना जीवन गुजार रहे थे। परिवार बड़ा होने के बावजूद आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण अलग-अलग पक्के मकान बनाना संभव नहीं हो सका।
ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पक्के मकान की सुविधा जीवन की बड़ी जरूरत है। बरसात के मौसम में कच्चे मकानों के गिरने का खतरा भी बढ़ जाता है। बीझौना गांव की घटना ने एक बार फिर ऐसे परिवारों की आवास संबंधी समस्याओं को सामने ला दिया है।
परिवार का कहना है कि यदि उन्हें समय रहते सरकारी आवास योजना का लाभ मिल जाता तो उन्हें कच्चे मकान में रहने की मजबूरी नहीं होती। उनका आरोप है कि उन्होंने आवास योजना के लाभ की उम्मीद की थी, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका।
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का आरोप
जमील मंसूरी के परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने की बात कही है। परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और पक्का मकान बनवाने की क्षमता नहीं है। ऐसे में सरकारी आवास योजना उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती थी।
परिवार ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने और पात्रता के आधार पर आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में उनके पास सुरक्षित रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
हालांकि, योजना का लाभ पाने के लिए पात्रता और सरकारी नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परिवार योजना के मानकों के तहत पात्र है या नहीं।
प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन
घटना की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही गई है। जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति और आवास योजना के लिए उसकी पात्रता की जानकारी जुटाई जाएगी।
अधिकारी के अनुसार, यदि जांच में परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र पाया जाता है तो नियमानुसार उसका नाम संबंधित सूची में शामिल कराने और योजना का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के इस आश्वासन के बाद परिवार को सरकारी मदद की उम्मीद जगी है। अब परिवार की नजर जांच प्रक्रिया और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है।
तत्काल मदद की मांग
मकान गिरने के बाद परिवार ने प्रशासन से तत्काल सहायता की मांग की है। परिवार का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित स्थान पर रहने की है। बारिश के मौसम में खुले या अस्थायी स्थान पर रहना परिवार के लिए मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से पीड़ित परिवार की स्थिति का मौके पर जायजा लेने और आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान कमजोर मकानों की स्थिति की जांच कराना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
बारिश ने बढ़ाई ग्रामीण परिवारों की चिंता
कानपुर देहात के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान कच्चे और पुराने मकानों को लेकर खतरा बना रहता है। लगातार पानी गिरने से मिट्टी की दीवारों और कमजोर ढांचों पर दबाव बढ़ सकता है। बीझौना गांव में हुई घटना इसी तरह की स्थिति की ओर संकेत करती है।
हालांकि इस घटना में परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित बच गए, लेकिन मकान और घरेलू सामान के नुकसान ने उनके सामने नई मुश्किल खड़ी कर दी है। अब परिवार प्रशासन से राहत और स्थायी आवास की उम्मीद लगाए बैठा है।
जिला प्रशासन की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि परिवार सरकारी आवास योजना के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं। फिलहाल परिवार की मांग है कि जांच प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए और यदि वह पात्र है तो उसे नियमानुसार आवास योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए।
बारिश के बीच मकान गिरने की इस घटना ने यह भी दिखाया है कि कमजोर मकानों में रहने वाले परिवारों की समय रहते पहचान और सहायता कितनी जरूरी है। यदि ऐसे परिवारों की स्थिति का पहले ही आकलन कर लिया जाए और पात्र परिवारों को सरकारी आवास योजनाओं से जोड़ा जाए, तो बरसात के मौसम में होने वाली दुर्घटनाओं और बेघर होने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।