आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में विधिक जागरूकता शिविर, छात्रों को पॉक्सो कानून और बाल सुरक्षा की दी जानकारी

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, 28 सितंबर। अहिंसा दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत उरई स्थित आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों और किसी भी आपात स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र के बारे में जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम-2012, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। विद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों और विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें कानून की सामान्य जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि कानूनी जानकारी केवल विवाद या अपराध की स्थिति में ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में भी मदद करती है।

पॉक्सो कानून के बारे में विद्यार्थियों को दी जानकारी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिविल जज जूनियर डिवीजन श्री प्रत्यूष प्रकाश ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार, दबाव या उत्पीड़न सामने आने पर उसे छिपाने के बजाय किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

उन्होंने बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाया। विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज या संदिग्ध महसूस कराता है तो ऐसी स्थिति में चुप रहने के बजाय तुरंत माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से सहायता लेनी चाहिए।

न्यायिक अधिकारी ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि डर या झिझक के कारण किसी गलत व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सूचना देने से संबंधित संस्था और प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

1098 और 112 की दी जानकारी

कार्यक्रम में सिविल जज जूनियर डिवीजन (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) श्री अनिरुद्ध सिंह ने विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 112 आपातकालीन सेवा के बारे में बताया तथा समझाया कि जरूरत पड़ने पर इन माध्यमों से सहायता ली जा सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करते समय अपनी निजी जानकारी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड और व्यक्तिगत तस्वीरों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। अनजान लोगों के साथ निजी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए और किसी संदिग्ध लिंक या संदेश पर बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।

विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि उन्हें सोशल मीडिया या इंटरनेट के माध्यम से किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़े तो इसकी जानकारी अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता और सावधानी को महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय बताया गया।

विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की जानकारी

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के बारे में भी बताया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि जनपद न्यायालय परिसर जालौन, उरई में स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस पर जाकर कानूनी सहायता और उससे संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों और आम नागरिकों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि जरूरतमंद व्यक्ति विधिक सहायता से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए इस माध्यम का उपयोग कर सकते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक या अन्य कारणों से किसी व्यक्ति को कानूनी सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो, इसके लिए विधिक सेवा संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों को अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता तंत्र की जानकारी होना आवश्यक है।

लोक अदालत और सुलह-समझौते के बारे में भी बताया

शिविर का संचालन कर रहे पीएलवी श्री महेश सिंह परिहार ने विद्यार्थियों को लोक अदालत तथा सुलह-समझौता केंद्र की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र लोगों को विभिन्न प्रकार की कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाया कि विवादों को आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से हल करने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी रखना भी जरूरी है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं के बारे में भी जानकारी साझा की।

प्रधानाचार्य ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री पुनीत भारती ने न्यायिक अधिकारियों, विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों और अन्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए कानून और उनके अधिकारों से जुड़ी जानकारी बेहद उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में कानून के प्रति समझ विकसित करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। यदि विद्यार्थी अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े उपायों को समझेंगे तो वे किसी कठिन परिस्थिति में सही व्यक्ति या संस्था से सहायता लेने के लिए अधिक जागरूक रहेंगे।

कार्यक्रम के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के डीईओ श्री दीपक नारायण, पीएलवी श्री महेंद्र कुमार मिश्रा, योगेंद्र सिंह तखेले, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कानून की जानकारी देने के साथ उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने, किसी भी अनुचित व्यवहार की सूचना देने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। इस तरह विद्यालय परिसर में आयोजित विधिक साक्षरता कार्यक्रम ने बच्चों के बीच कानून, अधिकार और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।

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आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में विधिक जागरूकता शिविर, छात्रों को पॉक्सो कानून और बाल सुरक्षा की दी जानकारी

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 28, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, 28 सितंबर। अहिंसा दिवस के अवसर पर चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत उरई स्थित आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों और किसी भी आपात स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र के बारे में जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम-2012, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। विद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों और विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें कानून की सामान्य जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि कानूनी जानकारी केवल विवाद या अपराध की स्थिति में ही उपयोगी नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने में भी मदद करती है।

पॉक्सो कानून के बारे में विद्यार्थियों को दी जानकारी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिविल जज जूनियर डिवीजन श्री प्रत्यूष प्रकाश ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार, दबाव या उत्पीड़न सामने आने पर उसे छिपाने के बजाय किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

उन्होंने बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाया। विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज या संदिग्ध महसूस कराता है तो ऐसी स्थिति में चुप रहने के बजाय तुरंत माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से सहायता लेनी चाहिए।

न्यायिक अधिकारी ने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि डर या झिझक के कारण किसी गलत व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सूचना देने से संबंधित संस्था और प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

1098 और 112 की दी जानकारी

कार्यक्रम में सिविल जज जूनियर डिवीजन (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) श्री अनिरुद्ध सिंह ने विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और 112 आपातकालीन सेवा के बारे में बताया तथा समझाया कि जरूरत पड़ने पर इन माध्यमों से सहायता ली जा सकती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी सचेत किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करते समय अपनी निजी जानकारी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड और व्यक्तिगत तस्वीरों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। अनजान लोगों के साथ निजी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए और किसी संदिग्ध लिंक या संदेश पर बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।

विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि यदि उन्हें सोशल मीडिया या इंटरनेट के माध्यम से किसी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़े तो इसकी जानकारी अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता और सावधानी को महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय बताया गया।

विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की जानकारी

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के बारे में भी बताया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि जनपद न्यायालय परिसर जालौन, उरई में स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस पर जाकर कानूनी सहायता और उससे संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों और आम नागरिकों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि जरूरतमंद व्यक्ति विधिक सहायता से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए इस माध्यम का उपयोग कर सकते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक या अन्य कारणों से किसी व्यक्ति को कानूनी सहायता प्राप्त करने में परेशानी न हो, इसके लिए विधिक सेवा संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों को अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता तंत्र की जानकारी होना आवश्यक है।

लोक अदालत और सुलह-समझौते के बारे में भी बताया

शिविर का संचालन कर रहे पीएलवी श्री महेश सिंह परिहार ने विद्यार्थियों को लोक अदालत तथा सुलह-समझौता केंद्र की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र लोगों को विभिन्न प्रकार की कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाया कि विवादों को आपसी सहमति और सुलह के माध्यम से हल करने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी रखना भी जरूरी है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं के बारे में भी जानकारी साझा की।

प्रधानाचार्य ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री पुनीत भारती ने न्यायिक अधिकारियों, विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों और अन्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए कानून और उनके अधिकारों से जुड़ी जानकारी बेहद उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में कानून के प्रति समझ विकसित करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। यदि विद्यार्थी अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े उपायों को समझेंगे तो वे किसी कठिन परिस्थिति में सही व्यक्ति या संस्था से सहायता लेने के लिए अधिक जागरूक रहेंगे।

कार्यक्रम के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के डीईओ श्री दीपक नारायण, पीएलवी श्री महेंद्र कुमार मिश्रा, योगेंद्र सिंह तखेले, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कानून की जानकारी देने के साथ उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने, किसी भी अनुचित व्यवहार की सूचना देने और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। इस तरह विद्यालय परिसर में आयोजित विधिक साक्षरता कार्यक्रम ने बच्चों के बीच कानून, अधिकार और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।