12 सूत्रीय मांगों को लेकर पेंशनर्स एसोसिएशन का धरना, आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण की मांग

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। राजकीय पेंशनर्स की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। संगठन के आह्वान पर आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में पेंशनर्स और संगठन पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पेंशनर्स से जुड़ी 12 प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ धरना शाम चार बजे तक चला। कार्यक्रम में पेंशनर्स ने अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। धरना सभा की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन जिला प्रवक्ता योगगुरु डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने लंबे समय तक सरकारी सेवाओं में योगदान दिया है, इसलिए उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण की मांग

धरने में सबसे प्रमुख मुद्दा पुराने पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल करने का रहा। संगठन का कहना है कि नए वेतन आयोग की प्रक्रिया में पेंशन पुनरीक्षण को भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि पुराने पेंशनर्स को संशोधित वेतनमान के अनुरूप लाभ मिल सके।

पेंशनर्स प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से पेंशन पुनरीक्षण की प्रतीक्षा कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत देने के लिए सरकार को संबंधित प्रक्रिया जल्द शुरू करनी चाहिए। साथ ही वेतन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने में लगने वाले समय को देखते हुए कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनर्स के लिए अंतरिम राहत दिए जाने की मांग भी उठाई गई।

जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव ने कहा कि पेंशन पुनरीक्षण से संबंधित प्रस्ताव को आठवें वेतन आयोग के समक्ष भेजने के लिए सरकार की ओर से जल्द आवश्यक आदेश जारी किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे पुराने पेंशनर्स की लंबे समय से चली आ रही मांग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।

पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग

धरने के दौरान पेंशनर्स ने पुरानी पेंशन व्यवस्था यानी ओपीएस को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद नियमित और पर्याप्त पेंशन सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए पेंशन व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों पर सरकार को पेंशनर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए विचार करना चाहिए।

इसके अलावा पेंशन राशिकरण की कटौती को वर्तमान व्यवस्था की तुलना में पहले समाप्त करने की मांग भी रखी गई। संगठन ने मांग की कि पेंशन राशिकरण की कटौती की अवधि को 10 वर्ष तक सीमित किया जाए। पेंशनर्स ने अलग-अलग आयु वर्ग में अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की मांग भी रखी। इसके तहत 65 वर्ष की उम्र पर पांच प्रतिशत, 70 वर्ष पर 10 प्रतिशत और 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की मांग की गई।

पेंशन को आयकर से मुक्त करने की मांग

पेंशनर्स ने पेंशन पर आयकर से संबंधित राहत की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ही अनेक बुजुर्गों की आय का मुख्य साधन होती है। ऐसे में पेंशन को आयकर के दायरे से बाहर करने पर वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक राहत मिल सकती है।

धरना सभा में वक्ताओं ने सरकार से कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 माह के डीए और डीआर एरियर का भुगतान करने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि लंबित महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान पेंशनर्स को जल्द किया जाना चाहिए।

रेल और बस किराये में छूट की मांग

पेंशनर्स एसोसिएशन ने वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा संबंधी सुविधा का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने मांग की कि वरिष्ठ नागरिकों को रेल और बस के किराये में 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाए। पेंशनर्स के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ चिकित्सा, पारिवारिक और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा की जरूरत बनी रहती है। किराये में राहत मिलने से वरिष्ठ नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है।

इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस उपचार की सीमा बढ़ाने की मांग भी की गई। संगठन ने वर्तमान पांच लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग रखी। वक्ताओं ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी खर्च बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा जरूरी है।

महंगाई भत्ते को पेंशन में मर्ज करने की मांग

धरना सभा में महंगाई भत्ते को मूल पेंशन अथवा वेतन में शामिल करने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने कहा कि जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे मूल वेतन या पेंशन में मर्ज करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। पेंशनर्स के मुताबिक इससे महंगाई के प्रभाव को देखते हुए उनकी आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए वरिष्ठ नागरिक आयोग के गठन की मांग भी की गई। संगठन का कहना है कि बुजुर्गों से संबंधित मामलों के समाधान और उनकी समस्याओं की नियमित निगरानी के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है।

जिलास्तरीय समस्याओं का ज्ञापन भी सौंपा

धरना समाप्त होने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इसके साथ ही जालौन जिले में राजकीय पेंशनर्स की स्थानीय समस्याओं से संबंधित अलग ज्ञापन भी जिलाधिकारी को दिया गया।

संगठन ने उम्मीद जताई कि शासन स्तर की मांगों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पदाधिकारियों ने कहा कि पेंशनर्स की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा।

धरना कार्यक्रम में संरक्षक लखन लाल अहिरवार, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अंगद सिंह राजावत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मानसिंह राजपूत, जिला मंत्री रामेश्वर दयाल कुशवाहा, कोषाध्यक्ष मंगल सिंह निरंजन, संगठन मंत्री राजेश कुलश्रेष्ठ, उपाध्यक्ष रमेश कुमार सक्सेना सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और पेंशनर्स मौजूद रहे।

धरने के माध्यम से पेंशनर्स ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें केवल पेंशन पुनरीक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधा, यात्रा में राहत, महंगाई भत्ता, आयकर, पुरानी पेंशन व्यवस्था और वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत सुरक्षा जैसे विषय भी उनके एजेंडे में शामिल हैं। अब संगठन की नजर सरकार की ओर से इन मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर है।

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12 सूत्रीय मांगों को लेकर पेंशनर्स एसोसिएशन का धरना, आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण की मांग

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 29, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। राजकीय पेंशनर्स की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। संगठन के आह्वान पर आयोजित इस धरने में बड़ी संख्या में पेंशनर्स और संगठन पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार से पेंशनर्स से जुड़ी 12 प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ धरना शाम चार बजे तक चला। कार्यक्रम में पेंशनर्स ने अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। धरना सभा की अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन जिला प्रवक्ता योगगुरु डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने लंबे समय तक सरकारी सेवाओं में योगदान दिया है, इसलिए उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

आठवें वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण की मांग

धरने में सबसे प्रमुख मुद्दा पुराने पेंशनर्स को आठवें वेतन आयोग के दायरे में शामिल करने का रहा। संगठन का कहना है कि नए वेतन आयोग की प्रक्रिया में पेंशन पुनरीक्षण को भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि पुराने पेंशनर्स को संशोधित वेतनमान के अनुरूप लाभ मिल सके।

पेंशनर्स प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से पेंशन पुनरीक्षण की प्रतीक्षा कर रहे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत देने के लिए सरकार को संबंधित प्रक्रिया जल्द शुरू करनी चाहिए। साथ ही वेतन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने में लगने वाले समय को देखते हुए कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनर्स के लिए अंतरिम राहत दिए जाने की मांग भी उठाई गई।

जिलाध्यक्ष हरगोविंद दयाल श्रीवास्तव ने कहा कि पेंशन पुनरीक्षण से संबंधित प्रस्ताव को आठवें वेतन आयोग के समक्ष भेजने के लिए सरकार की ओर से जल्द आवश्यक आदेश जारी किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इससे पुराने पेंशनर्स की लंबे समय से चली आ रही मांग को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।

पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग

धरने के दौरान पेंशनर्स ने पुरानी पेंशन व्यवस्था यानी ओपीएस को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से रखी। संगठन का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद नियमित और पर्याप्त पेंशन सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए पेंशन व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों पर सरकार को पेंशनर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए विचार करना चाहिए।

इसके अलावा पेंशन राशिकरण की कटौती को वर्तमान व्यवस्था की तुलना में पहले समाप्त करने की मांग भी रखी गई। संगठन ने मांग की कि पेंशन राशिकरण की कटौती की अवधि को 10 वर्ष तक सीमित किया जाए। पेंशनर्स ने अलग-अलग आयु वर्ग में अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की मांग भी रखी। इसके तहत 65 वर्ष की उम्र पर पांच प्रतिशत, 70 वर्ष पर 10 प्रतिशत और 75 वर्ष की आयु पूरी होने पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की मांग की गई।

पेंशन को आयकर से मुक्त करने की मांग

पेंशनर्स ने पेंशन पर आयकर से संबंधित राहत की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन ही अनेक बुजुर्गों की आय का मुख्य साधन होती है। ऐसे में पेंशन को आयकर के दायरे से बाहर करने पर वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक राहत मिल सकती है।

धरना सभा में वक्ताओं ने सरकार से कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 माह के डीए और डीआर एरियर का भुगतान करने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि लंबित महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान पेंशनर्स को जल्द किया जाना चाहिए।

रेल और बस किराये में छूट की मांग

पेंशनर्स एसोसिएशन ने वरिष्ठ नागरिकों की यात्रा संबंधी सुविधा का मुद्दा भी उठाया। संगठन ने मांग की कि वरिष्ठ नागरिकों को रेल और बस के किराये में 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाए। पेंशनर्स के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ चिकित्सा, पारिवारिक और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा की जरूरत बनी रहती है। किराये में राहत मिलने से वरिष्ठ नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है।

इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस उपचार की सीमा बढ़ाने की मांग भी की गई। संगठन ने वर्तमान पांच लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने की मांग रखी। वक्ताओं ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी खर्च बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा जरूरी है।

महंगाई भत्ते को पेंशन में मर्ज करने की मांग

धरना सभा में महंगाई भत्ते को मूल पेंशन अथवा वेतन में शामिल करने की मांग भी उठाई गई। संगठन ने कहा कि जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो उसे मूल वेतन या पेंशन में मर्ज करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। पेंशनर्स के मुताबिक इससे महंगाई के प्रभाव को देखते हुए उनकी आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए वरिष्ठ नागरिक आयोग के गठन की मांग भी की गई। संगठन का कहना है कि बुजुर्गों से संबंधित मामलों के समाधान और उनकी समस्याओं की नियमित निगरानी के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है।

जिलास्तरीय समस्याओं का ज्ञापन भी सौंपा

धरना समाप्त होने के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। इसके साथ ही जालौन जिले में राजकीय पेंशनर्स की स्थानीय समस्याओं से संबंधित अलग ज्ञापन भी जिलाधिकारी को दिया गया।

संगठन ने उम्मीद जताई कि शासन स्तर की मांगों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पदाधिकारियों ने कहा कि पेंशनर्स की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा।

धरना कार्यक्रम में संरक्षक लखन लाल अहिरवार, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अंगद सिंह राजावत, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मानसिंह राजपूत, जिला मंत्री रामेश्वर दयाल कुशवाहा, कोषाध्यक्ष मंगल सिंह निरंजन, संगठन मंत्री राजेश कुलश्रेष्ठ, उपाध्यक्ष रमेश कुमार सक्सेना सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और पेंशनर्स मौजूद रहे।

धरने के माध्यम से पेंशनर्स ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें केवल पेंशन पुनरीक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधा, यात्रा में राहत, महंगाई भत्ता, आयकर, पुरानी पेंशन व्यवस्था और वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत सुरक्षा जैसे विषय भी उनके एजेंडे में शामिल हैं। अब संगठन की नजर सरकार की ओर से इन मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर है।