दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य सक्रियता बढ़ी, विवादित क्षेत्र के आसपास नौसैनिक और हवाई अभ्यास
बीजिंग/मनीला, 1 अक्टूबर 2026। दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री विवाद के बीच चीन की सैन्य गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल के दिनों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के दक्षिणी थिएटर कमांड ने विवादित स्कारबोरो शोआल (Huangyan Dao) के आसपास समुद्री और हवाई गतिविधियां की हैं। चीनी पक्ष ने इन गतिविधियों को अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया है।

स्कारबोरो शोआल दक्षिण चीन सागर का एक महत्वपूर्ण और विवादित समुद्री क्षेत्र है। चीन इसे हुआंगयान दाओ के नाम से अपना क्षेत्र बताता है, जबकि फिलीपींस भी इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है। इसी वजह से यहां होने वाली सैन्य, तटरक्षक या समुद्री गतिविधियां अक्सर दोनों देशों के बीच तनाव का विषय बन जाती हैं।
चीन ने क्या कहा?
चीनी सेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 के अंत में दक्षिणी थिएटर कमांड की नौसैनिक और हवाई इकाइयों ने हुआंगयान दाओ के आसपास संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधि की। चीन के रक्षा मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई कुछ देशों द्वारा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के जवाब में की गई।
चीनी सेना के अनुसार, अभ्यास का उद्देश्य अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की रक्षा करने की क्षमता को परखना तथा उसे मजबूत करना था। अभ्यास में निगरानी एवं शुरुआती चेतावनी, तेज सैन्य प्रतिक्रिया और संयुक्त खोज एवं बचाव जैसे प्रशिक्षण विषय शामिल किए गए।
चीन ने यह भी संकेत दिया है कि दक्षिणी थिएटर कमांड की सेनाएं क्षेत्र में उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखेंगी। बीजिंग लंबे समय से दक्षिण चीन सागर में अपने व्यापक क्षेत्रीय दावों को लेकर स्पष्ट रुख रखता आया है।
विवाद का केंद्र क्यों है स्कारबोरो शोआल?
स्कारबोरो शोआल फिलीपींस के तट के पास स्थित समुद्री क्षेत्र है और यह दक्षिण चीन सागर के सबसे संवेदनशील विवादित स्थानों में शामिल है। चीन और फिलीपींस दोनों इस क्षेत्र पर अधिकार का दावा करते हैं। समुद्री संसाधनों, मछली पकड़ने और रणनीतिक स्थिति के कारण इसका महत्व काफी अधिक है।
दक्षिण चीन सागर में चीन के अलावा फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों पर दावे रखते हैं। इन दावों की सीमाएं कई स्थानों पर एक-दूसरे से टकराती हैं। इस कारण क्षेत्र में समुद्री गश्त और सैन्य गतिविधियां अक्सर कूटनीतिक तनाव का कारण बनती हैं।
फिलीपींस के साथ बढ़ता तनाव
चीन की हालिया सैन्य गतिविधियों को चीन और फिलीपींस के बीच बढ़े तनाव की व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। सितंबर 2026 में फिलीपींस ने आरोप लगाया था कि चीन के तटरक्षक जहाजों ने दक्षिण चीन सागर में एक पुनःआपूर्ति अभियान में बाधा डाली। फिलीपींस के अनुसार, चीनी जहाजों की गतिविधियों से टक्कर का खतरा पैदा हुआ था, हालांकि उस घटना में कोई टक्कर या चोट नहीं हुई।
इससे पहले भी दोनों देशों के बीच विवादित समुद्री क्षेत्रों में जहाजों और विमानों की गतिविधियों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। चीन आमतौर पर ऐसी कार्रवाइयों को अपनी संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की रक्षा से जोड़ता है, जबकि फिलीपींस अपनी समुद्री गतिविधियों को अपने अधिकार क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उचित बताता रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं सैन्य गश्त
दक्षिण चीन सागर में चीनी नौसैनिक और हवाई गश्त कोई नई घटना नहीं है। जुलाई और अगस्त 2026 में भी चीनी सेना ने इस क्षेत्र में नियमित तथा युद्धक तैयारी वाली गश्त की जानकारी दी थी। चीनी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन गतिविधियों में नौसेना और वायुसेना की इकाइयां शामिल थीं।
जुलाई में स्कारबोरो शोआल के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों में आधुनिक युद्धपोतों और विभिन्न प्रकार के सैन्य विमानों की मौजूदगी की जानकारी भी सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि चीन इस क्षेत्र में अपनी निगरानी और सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता को लगातार सक्रिय रखना चाहता है।
क्षेत्रीय देशों पर असर
दक्षिण चीन सागर केवल चीन और फिलीपींस के बीच विवाद का विषय नहीं है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े व्यापारिक समुद्री मार्गों में शामिल होने के कारण यहां किसी भी बड़े सैन्य तनाव का असर व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश इस क्षेत्र में स्थिरता और समुद्री यातायात की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानते हैं। इसी कारण चीन और फिलीपींस के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर क्षेत्रीय देशों की नजर रहती है।
अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी दक्षिण चीन सागर में समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। दूसरी ओर, चीन ऐसे बाहरी देशों की सैन्य भागीदारी को क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला कदम बताता रहा है। सितंबर में चीन के रक्षा मंत्री ने भी क्षेत्रीय सुरक्षा मंच पर देशों से उकसावे वाली गतिविधियों से बचने की अपील की थी।
2016 के अंतरराष्ट्रीय फैसले की पृष्ठभूमि
दक्षिण चीन सागर विवाद की कानूनी पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण है। 2016 में स्थायी मध्यस्थता न्यायाधिकरण से जुड़े एक फैसले ने दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक ऐतिहासिक अधिकार संबंधी दावों पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष दिए थे। चीन ने उस फैसले को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भी क्षेत्रीय विवाद समाप्त नहीं हुआ और समुद्री गतिविधियां जारी रहीं।
यही कारण है कि दक्षिण चीन सागर में किसी भी सैन्य अभ्यास या गश्त को केवल स्थानीय गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाता। इसके पीछे क्षेत्रीय दावे, अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री सुरक्षा और बड़ी शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
सैन्य गतिविधियों का बढ़ता महत्व
हाल की गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि दक्षिण चीन सागर में चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को सक्रिय बनाए हुए है। संयुक्त नौसैनिक और हवाई अभ्यास के जरिए चीन अपनी सेनाओं के बीच समन्वय, निगरानी तथा तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर जोर देता दिखाई देता है।
हालांकि किसी सैन्य गश्त या अभ्यास को सीधे तौर पर बड़े संघर्ष की शुरुआत मानना उचित नहीं होगा। ऐसे अभ्यास कई बार रणनीतिक संदेश देने, सैन्य तैयारी जांचने और संबंधित क्षेत्रों में मौजूदगी दिखाने के उद्देश्य से भी किए जाते हैं। दक्षिण चीन सागर में घटनाओं को समझने के लिए अलग-अलग देशों के आधिकारिक बयानों और स्वतंत्र रिपोर्टों को साथ देखना जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है?
दक्षिण चीन सागर में आने वाले समय में चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री गतिविधियों पर निगरानी बनी रहने की संभावना है। दोनों देशों के बीच बातचीत और क्षेत्रीय कूटनीति के साथ-साथ समुद्र और हवाई क्षेत्र में उनकी गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
चीन ने हालिया अभ्यास को अपनी संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की रक्षा से जुड़ा आवश्यक कदम बताया है। दूसरी तरफ, फिलीपींस लगातार अपने समुद्री अधिकारों और गतिविधियों को लेकर अपना पक्ष रखता रहा है। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश विवादित क्षेत्रों में अपनी सैन्य और तटरक्षक गतिविधियों को किस तरह संचालित करते हैं और संवाद के लिए कितनी जगह बनाए रखते हैं।
दक्षिण चीन सागर का विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संबंध केवल दो देशों के दावों से नहीं, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से है। हाल की चीनी नौसैनिक और हवाई गतिविधियां इसी व्यापक क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और विवाद की एक नई कड़ी के रूप में सामने आई हैं।