कुंडा-बाबागंज में 30 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं को मंजूरी, तीन प्रमुख मार्गों और पुल से बदलेगी तस्वीर
अंशुमान द्विवेदी
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता प्रतापगढ़
कुंडा, प्रतापगढ़। कुंडा और बाबागंज विधानसभा क्षेत्रों में सड़क और पुल से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को शासन से मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन कार्यों पर कुल 30 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग की ओर से परियोजनाओं के लिए ई-निविदा प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है। इन योजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र के कई गांवों में आवागमन की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं में बकुलाही नदी पर लघु सेतु का निर्माण, डेरवा-गलगली मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण तथा बाघराय-राजापुर संपर्क मार्ग का विकास शामिल है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इन सड़कों और पुल की जरूरत महसूस की जा रही थी। खासकर बरसात के दौरान नदी और जर्जर सड़कों के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता था।
बकुलाही नदी पर बनेगा लघु सेतु
कुंडा विधानसभा क्षेत्र में बूढ़ेपुर पियारिया से सरई नाहर संपर्क मार्ग पर बकुलाही नदी के ऊपर लघु सेतु और पहुंच मार्ग बनाए जाने की योजना है। इसके लिए करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के मौसम में बकुलाही नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता था। बूढ़ेपुर, पियारिया और सरई नाहर समेत आसपास के गांवों के लोगों को रोजमर्रा के काम, शिक्षा, कृषि गतिविधियों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे मार्गों का सहारा लेना पड़ता था।
पुल बनने के बाद ग्रामीणों को वर्षा के दौरान आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के लिए स्कूल-कॉलेज पहुंचना आसान हो सकता है, जबकि किसानों को खेतों और स्थानीय बाजारों के बीच आने-जाने में सुविधा मिलेगी। आपात स्थिति में मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में भी समय की बचत हो सकती है।
डेरवा-गलगली मार्ग का होगा चौड़ीकरण
तीनों योजनाओं में सबसे बड़ी परियोजना डेरवा-गलगली मार्ग से संबंधित बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सगरा सुंदरपुर-बाबूगंज-डेरवा-गलगली मार्ग के किलोमीटर 12.200 से 22.500 तक के लगभग 10 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
इस कार्य की अनुमानित लागत 16 करोड़ 10 लाख रुपये बताई गई है। क्षेत्रीय लोगों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से आसपास के ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रमुख बाजारों और दूसरे क्षेत्रों से होता है।
लंबे समय से सड़क की स्थिति को लेकर लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के बाद वाहनों की आवाजाही सुगम होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय व्यापार को भी फायदा मिलने की संभावना है।
यह मार्ग प्रयागराज और आसपास के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी उपयोगी है। सड़क की स्थिति बेहतर होने पर स्थानीय स्तर पर आवागमन का दबाव कम करने और यात्रा के समय को घटाने में मदद मिल सकती है।
बाघराय-राजापुर मार्ग को भी मिलेगी नई दिशा
बाबागंज विधानसभा क्षेत्र में बाघराय से राजापुर संपर्क मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की योजना भी शामिल है। करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबे इस मार्ग के लिए 9 करोड़ 40 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।
बाघराय और राजापुर के बीच यह मार्ग आसपास के गांवों तथा बाजारों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़क के बेहतर होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सड़कों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अच्छी सड़क होने पर किसान अपनी उपज को स्थानीय बाजार, मंडी और अन्य खरीद केंद्रों तक अपेक्षाकृत आसानी से पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए भी परिवहन सुविधा बेहतर होती है।
स्थानीय विकास पर जोर देने का दावा
इन परियोजनाओं को लेकर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया तथा बाबागंज विधायक विनोद सरोज की भूमिका का उल्लेख किया गया है। दिए गए विवरण के अनुसार, क्षेत्रीय आवश्यकताओं को शासन के सामने रखने और संबंधित सड़कों के लिए पैरवी करने के बाद इन परियोजनाओं को मंजूरी मिली।
रघुराज प्रताप सिंह 1993 से कुंडा विधानसभा सीट से लगातार निर्वाचित होते रहे हैं। 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वह सात बार इस सीट से विधायक चुने जा चुके हैं।
वहीं, उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि बाबागंज क्षेत्र में विनोद सरोज लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टों में भी बाबागंज सीट और विनोद सरोज का उल्लेख मिलता है।
बरसात में सबसे अधिक राहत की उम्मीद
कुंडा-बाबागंज के ग्रामीण इलाकों में बरसात के दौरान सड़क और पुल से संबंधित समस्याएं अधिक गंभीर हो जाती हैं। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में बकुलाही नदी पर प्रस्तावित पुल को स्थानीय ग्रामीणों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि पुल और पहुंच मार्ग का निर्माण निर्धारित समय पर पूरा होता है, तो कई गांवों के बीच संपर्क पूरे वर्ष बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों और मरीजों सहित आम यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
विकास कार्यों से बढ़ सकती है आर्थिक गतिविधि
सड़क परियोजनाओं का प्रभाव केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहता। बेहतर सड़क नेटवर्क से बाजारों तक पहुंच आसान होती है, परिवहन लागत घट सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
डेरवा-गलगली तथा बाघराय-राजापुर मार्ग के सुदृढ़ीकरण से स्थानीय बाजारों और आसपास के गांवों के बीच संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। कृषि उत्पादों के परिवहन में सुधार होने पर किसानों को भी सुविधा मिल सकती है।
इसके अलावा बेहतर सड़कें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने में सहायक होती हैं। गांवों से कस्बों और बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक आने-जाने में समय कम होने से लोगों को व्यावहारिक राहत मिल सकती है।
ई-निविदा के बाद आगे बढ़ेगा काम
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग ने इन परियोजनाओं के लिए ई-निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। सामान्यतः निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को कार्यादेश जारी किया जाता है और इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ता है।
स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि निविदा प्रक्रिया कब पूरी होती है और निर्माण कार्य कब जमीन पर शुरू होता है। परियोजनाओं की गुणवत्ता तथा निर्धारित समयसीमा में काम पूरा होना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
तीनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कुंडा और बाबागंज क्षेत्र में सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। बकुलाही नदी पर पुल जहां बरसात के दौरान संपर्क की समस्या कम कर सकता है, वहीं डेरवा-गलगली और बाघराय-राजापुर मार्ग के चौड़ीकरण से रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को सुविधा मिल सकती है।
इस प्रकार, प्रस्तावित कार्यों को क्षेत्र के ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के रूप में देखा जा रहा है। अब इन योजनाओं की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य कब शुरू होता है, किस गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता है और निर्धारित समयसीमा के भीतर लोगों को इसका लाभ कब मिल पाता है।