आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज को लेकर परिजनों की चिंता, अस्पताल पर अतिरिक्त शुल्क मांगने का आरोप
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर देहात/कानपुर। आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों के इलाज का सहारा बनी है। योजना का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी बीच कानपुर क्षेत्र के कल्याणपुर स्थित Aashirya Hospital में भर्ती एक मरीज के इलाज को लेकर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि मरीज के पास आयुष्मान कार्ड सक्रिय होने के बावजूद इलाज के दौरान उनसे अलग-अलग मदों के नाम पर बड़ी रकम की मांग की जा रही है।

परिजनों के अनुसार, मरीज निकिता सिंह की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्तमान में उनका उपचार ICU में चलने की बात कही गई है। परिवार का दावा है कि मरीज की हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकीय निगरानी और उपचार की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने इलाज का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है।
आयुष्मान कार्ड के बावजूद खर्च को लेकर सवाल
परिजनों की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक मरीज के नाम पर आयुष्मान कार्ड उपलब्ध है। परिवार का कहना है कि कार्ड योजना के तहत उपचार की सुविधा लेने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया, लेकिन इलाज की प्रक्रिया के दौरान उनसे अतिरिक्त राशि की मांग की गई।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में दवा, जांच, खून और ICU से जुड़े खर्चों के नाम पर उनसे रकम मांगी जा रही है। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह लगातार बड़ी राशि का इंतजाम कर सके। इसी वजह से मरीज के उपचार को लेकर परिवार में चिंता बढ़ती जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि इस सामग्री के आधार पर नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसलिए अतिरिक्त शुल्क की मांग, उसकी प्रकृति और वह आयुष्मान योजना के अंतर्गत आने वाले उपचार से संबंधित है या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
ICU में चल रहा इलाज
परिवार द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में मरीज को अस्पताल के बेड पर उपचार लेते हुए देखा जा सकता है। एक तस्वीर में अस्पताल के ICU से संबंधित जानकारी दिखाई देती है। परिजनों का कहना है कि मरीज की स्थिति को देखते हुए लगातार चिकित्सकीय देखभाल आवश्यक है।
गंभीर बीमारी या ICU उपचार की स्थिति में परिवार पहले से ही मानसिक दबाव में रहता है। ऐसे समय में यदि उपचार के खर्च को लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो जाए तो परेशानी और बढ़ सकती है। परिवार का कहना है कि उनकी प्राथमिकता मरीज का इलाज है, लेकिन आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण वे लगातार बढ़ रहे खर्च को लेकर चिंतित हैं।
परिवार ने अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की
मामले में मरीज के परिजनों ने आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार चाहता है कि यह स्पष्ट किया जाए कि मरीज के इलाज में कौन-कौन सी सेवाएं आयुष्मान योजना के दायरे में आती हैं और किन सेवाओं के लिए अलग से भुगतान का प्रावधान है।
परिजनों का कहना है कि यदि मरीज योजना के लिए पात्र है और उपचार संबंधित पैकेज के अंतर्गत आता है, तो उन्हें योजना के नियमों के अनुसार सुविधा मिलनी चाहिए। उनका आग्रह है कि संबंधित अधिकारी अस्पताल और परिवार के बीच उत्पन्न स्थिति की जांच करें तथा पात्रता और उपचार पैकेज के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराएं।
आयुष्मान योजना में पारदर्शिता क्यों जरूरी
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि लाभार्थी अक्सर सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवारों से आते हैं।
यदि किसी मरीज को यह जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो कि कौन-सा उपचार योजना में शामिल है, कौन-सी जांच या प्रक्रिया पैकेज का हिस्सा है और किन परिस्थितियों में अतिरिक्त भुगतान लागू हो सकता है, तो विवाद की संभावना कम हो सकती है। इसी तरह अस्पतालों के लिए भी उपचार और बिलिंग से संबंधित नियमों का पालन करना तथा मरीज के परिजनों को आवश्यक जानकारी देना महत्वपूर्ण है।
दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में अस्पताल का बिल, मरीज की उपचार संबंधी जानकारी, आयुष्मान कार्ड की स्थिति, स्वीकृत पैकेज और अस्पताल द्वारा मांगी गई राशि से संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर यह निर्धारित किया जा सकता है कि परिवार से मांगी गई राशि किस मद में थी और वह योजना के नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
परिजनों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में मरीज के उपचार और आयुष्मान कार्ड से संबंधित जानकारी दिखाई दे रही है, लेकिन किसी भी दस्तावेज के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित विभाग या अस्पताल से आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
परिवार की मांग—इलाज में न आए आर्थिक बाधा
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि मरीज का समुचित उपचार सुनिश्चित कराना है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे चाहते हैं कि पात्र सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ उन्हें समय पर मिले और इलाज पैसे की कमी के कारण प्रभावित न हो।
परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान योजना के संबंधित अधिकारियों से मामले को देखने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि कोई तकनीकी या दस्तावेजी समस्या है तो उसे तत्काल दूर किया जाए, ताकि मरीज को आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिलती रहे।
इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित अधिकारियों की जांच और अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया के बाद अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से मरीज के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और साझा की गई तस्वीरों पर आधारित है। अस्पताल पर लगाए गए आरोपों को आधिकारिक जांच या संबंधित पक्ष का जवाब आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।