फ़रवरी 12, 2026

एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत का आतंकवाद पर कड़ा रुख: क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत संदेश

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Anoop singh

क़िंगदाओ, चीन | 26 जून, 2025
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ अपने कड़े और अडिग रुख को दुनिया के सामने स्पष्ट किया। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण मंच से जोरदार भाषण देते हुए दो टूक कहा कि भारत आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाता है और इस दिशा में भारत की प्रतिबद्धता केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ठोस कार्रवाइयों के जरिए बार-बार सिद्ध किया गया है।

राजनाथ सिंह ने अपने बयान में आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों को सीधे तौर पर चेतावनी दी कि अब “आतंकवाद के केंद्र अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं”। इस बयान को विश्लेषकों ने उन देशों के प्रति एक स्पष्ट संदेश माना है जो आतंकवादी गुटों को आश्रय और समर्थन देते हैं।

चरमपंथी विचारधाराओं के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान

रक्षा मंत्री ने केवल आतंकवादी घटनाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि युवाओं में बढ़ती कट्टरपंथी सोच के खिलाफ भी समय रहते कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को समय रहते गुमराह होने से रोकने के लिए प्रारंभिक हस्तक्षेप और शिक्षा कार्यक्रमों की ज़रूरत है।

उन्होंने एससीओ की “रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS)” की सराहना करते हुए इसे सदस्य देशों के बीच समन्वय और साझा रणनीति के लिए एक प्रभावी मंच बताया।

दोहरा मापदंड अस्वीकार्य

राजनाथ सिंह ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी एससीओ सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे उन देशों पर मिलकर दबाव बनाएं जो सीधे या परोक्ष रूप से आतंकवादी तत्वों को संरक्षण दे रहे हैं।

उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत की एससीओ अध्यक्षता के दौरान जो संयुक्त घोषणा जारी की गई थी – “चरमपंथ, आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ” – वह इस दिशा में साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

स्थायी शांति के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी

भाषण के समापन में रक्षा मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सच्ची शांति और सतत विकास तभी संभव है जब सभी सदस्य देश मिलकर आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए कार्य करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस साझा प्रयास में नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

भारत के इस सख्त रुख ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा में उसकी भूमिका को रेखांकित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि नई दिल्ली वैश्विक मंचों पर निर्णायक और स्पष्ट आवाज के साथ खड़ा है


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