पुणे में साइबर जालसाजी का पर्दाफाश: ऑनलाइन निवेश के बहाने 22 करोड़ रुपये की ठगी

तकनीक ने जहां निवेश की दुनिया को आसान और सुलभ बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसका दुरुपयोग कर नए-नए तरीके विकसित कर लिए हैं। महाराष्ट्र के पुणे शहर में सामने आए एक ताज़ा मामले ने ऑनलाइन ट्रेडिंग की आड़ में हो रही बड़ी ठगी को उजागर कर दिया है। साइबर अपराध शाखा ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने 85 वर्षीय बुजुर्ग को कथित शेयर बाजार निवेश के नाम पर लगभग ₹22.03 करोड़ का चूना लगा दिया।
अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में चार आरोपियों को छत्रपति संभाजीनगर और ठाणे से हिरासत में लिया गया, जिससे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
ऐसे रचा गया विश्वास का जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने पहले पीड़ित से संपर्क साधकर उन्हें ऊंचे मुनाफे का सपना दिखाया। इसके लिए एक नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया गया और व्हाट्सएप समूहों तथा संदिग्ध मोबाइल ऐप के माध्यम से उन्हें जोड़ा गया।
शुरुआती चरण में पीड़ित को काल्पनिक लाभ दिखाकर भरोसा जीतने की रणनीति अपनाई गई। जब विश्वास पूरी तरह कायम हो गया, तब बड़ी रकम निवेश के नाम पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई। देखते ही देखते रकम करोड़ों में पहुंच गई और फिर उसे कई स्तरों से गुज़ारकर गायब करने की कोशिश की गई।
लेनदेन की गहराई से पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की। लगभग 40 हजार बैंक लेनदेन की छानबीन की गई, जिससे धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान करीब ₹3.24 करोड़ की राशि विभिन्न खातों में रोक दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि ठगी की रकम पहले पश्चिम बंगाल स्थित खातों में भेजी गई थी, बाद में उसे संभाजीनगर के खातों में ट्रांसफर किया गया। इस दौरान तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट्स’ का सहारा लिया गया—ऐसे खाते जो मामूली कमीशन के बदले ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। इसका उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाना था।
किन्हें किया गया गिरफ्तार
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं:
- सहिल श्रीसुंदरम (22 वर्ष)
- विश्वजीत खंडारे (21 वर्ष)
- अभिजीत नाडे (21 वर्ष)
- दिशांत कांबले (22 वर्ष) – छत्रपति संभाजीनगर
- मुनिलकुमार सुरेंद्र सिंह (51 वर्ष) – ठाणे
प्रारंभिक जानकारी से पता चला है कि कुछ आरोपी बेरोजगार थे या अस्थायी काम कर रहे थे, जबकि एक व्यक्ति निजी सुरक्षा सेवा से जुड़ा हुआ था। पुलिस अभी भी इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है।
कानूनी प्रावधान और आगे की कार्रवाई
यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की प्रासंगिक धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है और आगे की जांच के लिए पुलिस हिरासत में लिया गया है।
यह घटना एक बार फिर संकेत देती है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले असाधारण लाभ के दावों से सावधान रहना अत्यंत आवश्यक है। निवेश से पहले आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन और सतर्कता ही ऐसी साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
