दिल्ली हाईकोर्ट ने मांग की MCD से जवाब – मंगोलपुरी मस्जिद विध्वंस मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई

नई दिल्ली, 26 जून 2025 – दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगोलपुरी क्षेत्र में स्थित एक मस्जिद के विध्वंस को लेकर दायर अवमानना याचिका पर बुधवार को नगर निगम (MCD) से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधी रात को मस्जिद को बिना किसी पूर्व सूचना या सीमांकन रिपोर्ट साझा किए तोड़ दिया गया।
यह मामला मंगोलपुरी मोहम्मदी जामा मस्जिद और मदरसा अनवर उल उलूम से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि MCD ने अदालत के पूर्व आदेश का उल्लंघन करते हुए मनमाने ढंग से विध्वंस की कार्रवाई शुरू की, जो पूरी तरह अवैध है।
हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रेनू भटनागर ने इस याचिका पर MCD से स्पष्ट जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख 9 जुलाई तय की गई है।
मस्जिद वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता रेनू ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि मस्जिद को बिना उचित क्षेत्र सीमांकन के रात के समय तोड़ा गया, जबकि मस्जिद को 400 वर्ग मीटर ज़मीन आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्यवाही अदालत के आदेशों की अवहेलना है।
वहीं, MCD ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विध्वंस की कार्यवाही रात में नहीं, बल्कि बुधवार सुबह की गई थी और उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगली सुनवाई तक कोई भी नई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस अवमानना याचिका को मंगोलपुरी मोहम्मदी जामा मस्जिद और मदरसा अनवरुल-उलूम वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर किया गया है। याचिका में कहा गया है कि 18 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने MCD को निर्देश दिया था कि वह सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण की पहचान कर उचित कार्रवाई करे। यदि याचिकाकर्ता द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो निगम कानूनी प्रक्रिया अपनाए।
इसके जवाब में 19 नवंबर 2024 को याचिकाकर्ता ने खुद ही स्वेच्छा से मस्जिद से सटी अतिक्रमण वाली संरचनाओं को पुलिस की मौजूदगी में हटा लिया था। इस पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ता ने अदालत में यह दावा किया कि इसके बावजूद MCD ने अपने विवेक से, कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर विध्वंस किया।
अब अदालत ने इस मामले में स्पष्टता की मांग की है और 9 जुलाई को अगली सुनवाई के दौरान MCD के विस्तृत जवाब की प्रतीक्षा रहेगी।
