फ़रवरी 12, 2026

यूरोपीय संघ का 2040 जलवायु लक्ष्य: हरित संकल्प और आर्थिक यथार्थ के बीच संतुलन

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Anoop singh

ब्रसेल्स, 28 जून 2025 — यूरोपीय संघ (EU) जल्द ही अपने 2040 के जलवायु लक्ष्य की आधिकारिक घोषणा करने जा रहा है, जो कि आने वाले दशकों में पर्यावरणीय रणनीति की दिशा तय करेगा। इस प्रस्तावित लक्ष्य में जहां एक ओर जलवायु नेतृत्व को सुदृढ़ करने की भावना है, वहीं यह आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर अधिक लचीला मार्ग भी अपना सकता है।

हाल ही में सामने आए एक मसौदे के अनुसार, यूरोपीय आयोग अब सदस्य देशों को यह अनुमति देने की योजना बना रहा है कि वे अपने 2040 के जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अन्य देशों से खरीदे गए कार्बन क्रेडिट्स का उपयोग कर सकें। हालांकि, इस फैसले को लेकर पर्यावरणविदों में चिंता है। उनका मानना है कि यह तंत्र प्रत्यक्ष उत्सर्जन कटौती के प्रभाव को कम करता है। फिर भी, EU इस विकल्प पर मात्रा की सीमा निर्धारित कर कुछ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य

यूरोपीय संघ का यह लक्ष्य 1990 के स्तर की तुलना में 2040 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 90% की शुद्ध कटौती करना था। लेकिन इटली, पोलैंड और चेक गणराज्य जैसे देशों द्वारा तीव्र विरोध और तकनीकी चुनौतियों के कारण अब आयोग इस लक्ष्य की समीक्षा कर रहा है।

ये देश मानते हैं कि अत्यधिक तीव्र और महंगे उपाय उनके उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव डाल सकते हैं, जिससे नौकरियों और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में आयोग अब एक ऐसा रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है जो पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ-साथ आर्थिक व्यवहार्यता को भी ध्यान में रखे।

लचीलापन या कमजोरी?

कार्बन ऑफसेट तंत्र (offset mechanism) को जलवायु परिवर्तन के समाधान के रूप में देखा तो जाता है, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि ये केवल “कागज़ी समाधान” हैं। फिर भी, यूरोपीय आयोग के अनुसार, यह लचीलापन सदस्य देशों को अपने हिसाब से रणनीति अपनाने का अवसर देगा, विशेषकर उन देशों को जो तकनीकी और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।

वैश्विक नेतृत्व की दिशा में कदम

हालांकि यूरोपीय संघ का अंतिम लक्ष्य 2050 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है, लेकिन 2040 का यह नया ढांचा एक अहम पड़ाव साबित होगा। यह तय करेगा कि EU जलवायु परिवर्तन के वैश्विक नेतृत्व में अपनी भूमिका को कैसे आगे बढ़ाता है।

आगामी 2 जुलाई को प्रस्ताव की आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है, जिसके बाद पूरे यूरोप में बहस तेज़ होने की संभावना है। यह योजना केवल पर्यावरणीय नीति नहीं होगी, बल्कि यह यूरोपीय संघ के आर्थिक भविष्य, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिति को भी प्रभावित करेगी।


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