‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाला: अधिकारियों पर नौकरी आवेदन मंजूरी का दबाव, सीबीआई का बड़ा दावा

नई दिल्ली, 1 जुलाई 2025 —
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत में ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाया गया था कि वे कुछ उम्मीदवारों के नौकरी आवेदन जल्द से जल्द मंजूर करें। यह घोटाला पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़ा हुआ है।
सीबीआई के अनुसार, लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए उम्मीदवारों या उनके परिजनों से बेहद कम दामों पर या उपहार स्वरूप ज़मीन लेकर बदले में उन्हें रेलवे की नौकरियां दी गईं। यह नियुक्तियां खासकर ग्रुप-डी पदों के लिए की गईं, जिनमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
मामले की सुनवाई कर रहे विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष विशेष लोक अभियोजक (SPP) डी.पी. सिंह ने चार्जशीट और गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे वरिष्ठ अधिकारियों पर चयन सूची को मंजूरी देने के लिए दबाव डाला गया। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि एक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी समेत कई गवाहों ने यह बात मानी है कि दबाव के चलते कुछ उम्मीदवारों को नियमों को दरकिनार कर नौकरी दे दी गई।
सीबीआई ने यह भी बताया कि सुनवाई की पिछली तारीख पर यह सामने लाया गया कि भर्ती प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां थीं। कई उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र नकली थे। कुछ ऐसे स्कूल भी पाए गए जो असल में अस्तित्व में ही नहीं थे, लेकिन वहां से फर्जी मार्कशीट और प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। इन जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल उम्मीदवारों ने सरकारी नौकरी पाने के लिए किया।
इतना ही नहीं, सीबीआई ने बताया कि कुछ उम्मीदवारों ने जिन स्कूलों का नाम दिया, उनमें वे कभी पढ़े ही नहीं थे। कई मामलों में आरोपी अपने नाम तक सही से नहीं लिख पा रहे थे, लेकिन उनके पास शैक्षणिक प्रमाणपत्र मौजूद थे।
इस मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा उनके परिजन, पूर्व सरकारी अधिकारी और कुछ लाभार्थी उम्मीदवारों को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत में सुनवाई जारी है और सीबीआई ने साफ किया है कि यह मामला भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का ज्वलंत उदाहरण है, जिसमें सत्ता का दुरुपयोग कर लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
निष्कर्ष:
‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाला केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार और प्रभावशाली लोगों द्वारा नियमों की अनदेखी का मामला है। अदालत की अगली सुनवाई में और तथ्य सामने आने की संभावना है।
