फ़रवरी 12, 2026

कोलकाता सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण: मुख्य आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजा गया, जांच में तेजी

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Anoop singh

कोलकाता, 1 जुलाई 2025 (एएनआई): दक्षिण 24 परगना जिले की अलीपुर अदालत ने कोलकाता के एक प्रतिष्ठित कानून कॉलेज में हुई सामूहिक दुष्कर्म की गंभीर घटना में शामिल तीन प्रमुख आरोपियों को 8 जुलाई तक पुलिस की हिरासत में रखने का आदेश दिया है। वहीं, चौथे आरोपी जो कॉलेज का सुरक्षा रक्षक बताया जा रहा है, उसे 4 जुलाई तक हिरासत में रखने की अनुमति दी गई है।

इस सनसनीखेज मामले में जिन तीन युवकों को मुख्य आरोपी माना गया है, उनके नाम हैं: मनोजित, प्रमित और जैब। चौथा आरोपी पिनाकी, कॉलेज परिसर में तैनात सुरक्षा गार्ड है। पुलिस का कहना है कि इन सभी को हिरासत में लेकर घटना से संबंधित गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ियाँ जोड़ी जा सकें।

यह अमानवीय कांड 25 जून 2025 को कोलकाता के कसबा क्षेत्र में स्थित एक लॉ कॉलेज के परिसर में घटित हुआ, जहाँ एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। घटना के बाद पीड़िता की ओर से की गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने 30 जून को तेज़ कार्रवाई करते हुए 12 घंटे से भी कम समय में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की यह तत्परता समाज में कानून-व्यवस्था के प्रति भरोसे का संकेत मानी जा रही है।

वहीं, एक आरोपी के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मामला अभी अदालत में है और जांच जारी है। मुझे भारत की न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है और मुझे उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी।” उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस पर भी विश्वास जताते हुए न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग की बात कही।

राजनीतिक स्तर पर यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे पश्चिम बंगाल सरकार की विफलता करार देते हुए एक विशेष तथ्यान्वेषी समिति गठित की है, जो मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि, “ऐसी घटनाएं अब राज्य में आम होती जा रही हैं, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाती हैं।” भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बयान दिया, “राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, भले ही राज्य की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हों, परंतु महिला सुरक्षा की स्थिति दयनीय है।

फिलहाल पुलिस घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिलेगा। पूरा देश इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सज़ा दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहा है।


निष्कर्ष:
यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहन आत्ममंथन की आवश्यकता को भी दर्शाता है। अब देखना यह है कि क्या न्याय प्रणाली और प्रशासन मिलकर पीड़िता को न्याय दिला पाएंगे।


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