फ़रवरी 12, 2026

ट्रंप के शरण प्रतिबंध पर संघीय न्यायालय की रोक: अमेरिका में आप्रवासन नीति पर बड़ा प्रभाव

0

Anoop singh

वॉशिंगटन डीसी, 3 जुलाई 2025 – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए विवादास्पद शरण प्रतिबंधों पर एक संघीय न्यायालय ने कड़ा प्रहार किया है। संघीय न्यायाधीश रैंडोल्फ डी. मॉस ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रंप के आदेश को अमान्य घोषित करते हुए इसे आव्रजन कानूनों का उल्लंघन बताया।

यह मामला उस एकदिनी आदेश से जुड़ा है, जिसमें ट्रंप प्रशासन ने दक्षिणी सीमा पर अमेरिका में प्रवेश कर रहे लोगों के लिए शरण लेने की प्रक्रिया लगभग असंभव बना दी थी। इस आदेश में दावा किया गया था कि अमेरिका की सीमाओं पर “आक्रमण जैसी स्थिति” उत्पन्न हो गई है, जिसके चलते यह कदम जरूरी हो गया था।

हालांकि, न्यायाधीश मॉस का मत इससे एकदम अलग रहा। उन्होंने कहा कि यह आदेश आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (INA) के मौलिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को संविधान या किसी भी संघीय कानून के अंतर्गत इतने व्यापक अधिकार नहीं दिए गए हैं कि वह मनमाने तरीके से शरण की परिभाषा और प्रक्रिया को सीमित कर सकें।

मॉस ने अपनी 123 पृष्ठों की विस्तृत राय में लिखा, “INA या संविधान राष्ट्रपति को यह अधिकार नहीं देता कि वह केवल एक उद्घोषणा के माध्यम से शरण लेने की प्रक्रिया को पलट सकें।” उन्होंने इस आदेश को न केवल कानून के विरुद्ध बताया, बल्कि मानवीय मूल्यों के खिलाफ भी माना।

इस फैसले पर व्हाइट हाउस के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार और आव्रजन नीति के शिल्पकार स्टीफन मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “अगर हमारी संप्रभुता बहाल नहीं की गई, तो पश्चिमी सभ्यता नहीं टिक पाएगी।”

यह मुकदमा तीन प्रमुख आप्रवासन संगठनों — Refugee and Immigrant Center for Education and Legal Services (RAICES), Las Americas Immigrant Advocacy Center, और Florence Immigrant and Refugee Rights Project — तथा ACLU (अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन) द्वारा दायर किया गया था। प्रशासन ने पहले इन संगठनों के अनुरोध पर 13 व्यक्तियों के निर्वासन पर रोक लगाने पर सहमति जताई थी, लेकिन यह आदेश अब व्यापक प्रभाव वाला बन गया है।

ट्रंप ने यह नीति अपने राष्ट्रपति पद की शुरुआत में ही अपनाई थी, लेकिन कानूनी चुनौतियों ने इसे पूरी तरह लागू नहीं होने दिया। अब, इस फैसले के बाद अमेरिका की शरण नीति को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।


निष्कर्ष:
इस निर्णय ने न केवल ट्रंप की आव्रजन नीति पर रोक लगाई है, बल्कि यह भी साबित किया है कि अमेरिका का संविधान और उसके कानून शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े हैं। यह फैसला आने वाले समय में अमेरिका की आव्रजन नीतियों की दिशा को गहराई से प्रभावित करेगा।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें