फ़रवरी 13, 2026

बिहार में मतदाता सूची संशोधन पर सचिन पायलट की आपत्ति: पारदर्शिता और संविधान की भावना पर उठे सवाल

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Anoop singh

दौसा (राजस्थान), 5 जुलाई 2025:
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision – SIR) पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने चुनाव आयोग पर जल्दबाज़ी में फैसला लेने का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र की पारदर्शिता के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।

राजस्थान के दौसा में पत्रकारों से बात करते हुए पायलट ने कहा, “जिस तेज़ी से चुनाव आयोग ने यह निर्णय लिया है, वह कई संदेहों को जन्म देता है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग से बातचीत की, परंतु उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर एक भी व्यक्ति को उनके मताधिकार से वंचित किया जाता है, तो यह संविधान की भावना के विपरीत होगा। “चुनाव आयोग ने यह कदम क्यों उठाया और अभी क्यों किया गया, इसका जवाब आवश्यक है,” पायलट ने सवाल उठाया।

सचिन पायलट ने यह आशंका भी जताई कि लोगों में यह डर बैठ गया है कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह ऐसे किसी भी कदम से बचे जिससे मतदाताओं के बीच अविश्वास पैदा हो।

विपक्ष का विरोध और दिल्ली में बैठक

इससे पहले बुधवार को, INDIA गठबंधन के 11 दलों के नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात की। उन्होंने बिहार में चल रहे मतदाता सूची संशोधन को “संविधान की मूल संरचना पर हमला” बताया और इसका पुरज़ोर विरोध दर्ज किया।

इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी भी शामिल थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की और यह मुद्दा उठाया कि बिहार विधानसभा चुनाव से महज़ कुछ महीने पहले इस प्रकार की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई।

बिहार में चुनाव और भविष्य की चिंता

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अंत तक संभावित हैं, लेकिन आधिकारिक तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है। ऐसे में विपक्ष का मानना है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव करना जनमत को प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष

बिहार में चल रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता जताई जा रही है। विपक्ष का दावा है कि यह कदम संविधान की मूल भावना और लोकतंत्र की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इन आशंकाओं का किस प्रकार समाधान करता है और प्रक्रिया को निष्पक्षता से संपन्न करने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।


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