ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन की नई पहल: स्वतंत्र भुगतान प्रणाली और राष्ट्रीय मुद्राओं के लेनदेन पर ज़ोर

🌍 प्रस्तावना
तेज़ी से बदलती वैश्विक राजनीति और आर्थिक समीकरणों के बीच ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई है। हाल ही में आयोजित 17वें ब्रिक्स सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक उल्लेखनीय विचार साझा किया — एक स्वतंत्र भुगतान तंत्र की स्थापना और सदस्य राष्ट्रों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम।
🔗 स्वतंत्र भुगतान प्रणाली क्या है?
यह प्रस्तावित ढांचा ब्रिक्स देशों को आपसी व्यापार में किसी तीसरे देश की मुद्रा — विशेषकर डॉलर — पर निर्भर रहने से मुक्त करेगा। इसका उद्देश्य है:
- भुगतान प्रक्रिया को अधिक तेज़, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना
- अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों से बचाव
- वित्तीय आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना
💱 स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन की बढ़ती प्रवृत्ति
पुतिन ने यह जानकारी भी दी कि 2024 में रूस और अन्य ब्रिक्स देशों के बीच लगभग 90% व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि रूसी रूबल, भारतीय रुपया, चीनी युआन, दक्षिण अफ्रीकी रैंड और ब्राज़ीलियाई रीयाल की भूमिका अंतरब्रिक्स व्यापार में लगातार बढ़ रही है।
📊 आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में रणनीतिक पहल
यह प्रस्ताव महज़ मुद्रा विनिमय का विकल्प नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक अर्थव्यवस्था-केंद्रित रणनीति है। इसके मुख्य लक्ष्य हैं:
- पश्चिमी वित्तीय संस्थाओं पर निर्भरता को न्यूनतम करना
- ब्रिक्स देशों के बीच आपसी निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना
- एक बहुध्रुवीय वैश्विक आर्थिक प्रणाली का निर्माण
🤝 ब्रिक्स सहयोग के तीन आधार स्तंभ
पुतिन ने ब्रिक्स सहयोग की रूपरेखा तीन बुनियादी क्षेत्रों में स्पष्ट की:
- राजनीति और सुरक्षा: बहुपक्षीय संवाद और स्थिरता
- आर्थिक और वित्तीय साझेदारी: वैकल्पिक आर्थिक संरचनाओं की नींव
- सांस्कृतिक एवं मानविक जुड़ाव: सभ्यताओं के बीच सहयोग व साझेदारी
🌐 निष्कर्ष
रूसी राष्ट्रपति द्वारा सुझाई गई यह नई स्वतंत्र निपटान प्रणाली न केवल ब्रिक्स सदस्य देशों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बना सकती है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय ढांचे में एक गंभीर विकल्प के रूप में उभर सकती है। यदि यह पहल व्यावहारिक रूप से सफल होती है, तो यह डॉलर आधारित एकध्रुवीय प्रणाली को चुनौती देने वाला एक ऐतिहासिक परिवर्तन साबित हो सकता है।
