फ़रवरी 14, 2026

एनआरसी नोटिस पर ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया: क्या खतरे में है लोकतांत्रिक ढांचा?

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Anoop singh

🔍 प्रस्तावना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने असम में रहने वाले उत्तम कुमार ब्रजाबासी को भेजे गए एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) नोटिस पर गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की है। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया जब उत्तम कुमार, जो कि कूचबिहार के दिनहाटा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं और राजबंशी समुदाय से आते हैं, को “विदेशी नागरिक” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जबकि वे पिछले पाँच दशकों से असम में रह रहे हैं।

🗣️ ममता बनर्जी की आपत्ति

मुख्यमंत्री बनर्जी ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र के खिलाफ एक “सुनियोजित हमला” करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह भाजपा द्वारा एक रणनीतिक प्रयास है, जो बंगाल में एनआरसी को थोपने की दिशा में किया जा रहा है, जबकि भाजपा के पास राज्य में ऐसा कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, यह कदम न केवल असंवैधानिक है बल्कि सामाजिक तौर पर भी भय पैदा करने वाला है, खासकर उन समुदायों के बीच जो पहले से ही उपेक्षित हैं।

⚖️ एनआरसी और उसकी जमीनी हकीकत

एनआरसी का मकसद अवैध प्रवासियों की पहचान करना है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली में पहले ही अनेक समस्याएं सामने आ चुकी हैं। असम में इस प्रक्रिया के दौरान लाखों लोगों को नागरिकता से वंचित कर दिया गया, जिनमें ऐसे भी लोग शामिल थे जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज मौजूद थे। अगर यह मॉडल पश्चिम बंगाल जैसे विविधतापूर्ण राज्य में दोहराया जाता है, तो इससे सामाजिक संतुलन और नागरिक स्वतंत्रताएं दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

🤝 लोकतांत्रिक गठबंधन की अपील

ममता बनर्जी ने इस मसले को लेकर समूचे विपक्ष से एकजुटता दिखाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भाजपा की “भय और विभाजन की राजनीति” का सामना केवल साझा लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता से ही किया जा सकता है। उनका मानना है कि बंगाल अपने संवैधानिक मूल्य और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।

🧭 निष्कर्ष

यह प्रकरण महज़ एक नागरिक को भेजे गए नोटिस से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत के संघीय ढांचे, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर उठ रहे व्यापक प्रश्नों का द्योतक है। यदि एनआरसी जैसी प्रणालियाँ राजनीतिक उद्देश्य से चलाई जाती हैं, तो इससे न केवल आम नागरिकों का जीवन प्रभावित होता है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा भी संकट में पड़ सकती है।


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