फ़रवरी 12, 2026

2050 तक वैश्विक जनसंख्या में हर तीसरा व्यक्ति होगा 60 वर्ष से अधिक: वर्ल्ड बैंक की चेतावनी और समाधान की दिशा

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नई दिल्ली, 23 जुलाई 2025 (HIT AND HOT NEWS): विश्व एक ऐतिहासिक जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर बढ़ रहा है। वर्ल्ड बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया की एक-तिहाई आबादी 60 वर्ष से अधिक उम्र की होगी। यह बदलाव मानव विकास की उपलब्धि तो है, लेकिन इसके साथ ही कई सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत चुनौतियाँ भी उत्पन्न होंगी।

लंबी उम्र: उपलब्धि या चुनौती?

स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण और जीवन स्तर में सुधार के चलते औसत जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि यह मानव सभ्यता के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है, लेकिन इससे समाजों को वृद्ध आबादी की देखभाल, स्वास्थ्य व्यवस्था, पेंशन प्रणाली और सामाजिक समावेश की दृष्टि से नई रणनीतियों की आवश्यकता होगी।

वर्ल्ड बैंक की सिफारिशें: सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था की तैयारी

वर्ल्ड बैंक का मानना है कि आज अगर सरकारें और समाज मिलकर दीर्घकालिक योजनाएं बनाएं, तो इस जनसांख्यिकीय बदलाव को बोझ नहीं, बल्कि अवसर में बदला जा सकता है। इसके लिए आवश्यक है:

  • सशक्त पेंशन एवं स्वास्थ्य बीमा प्रणाली
  • वृद्धजनों के लिए अनुकूल बुनियादी ढांचे का विकास
  • आर्थिक रूप से सक्रिय वृद्धावस्था को बढ़ावा देना
  • पीढ़ियों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहन देना
  • डेटा आधारित योजनाएं और तकनीकी नवाचारों का उपयोग

बुज़ुर्ग आबादी: बोझ नहीं, अनुभव का खजाना

वर्ल्ड बैंक ने “पॉवर ऑफ हेल्दी लॉन्गिविटी” (स्वस्थ दीर्घायु की शक्ति) की अवधारणा को बढ़ावा दिया है। इसके तहत यह सुझाव दिया गया है कि वृद्धजन समाज के लिए केवल देखभाल के पात्र नहीं हैं, बल्कि उनके अनुभव, ज्ञान और कार्यकुशलता को सामाजिक और आर्थिक विकास में शामिल किया जा सकता है।

नवीन सोच की आवश्यकता

यह समय है जब हमें वृद्धावस्था को केवल बीमारी और निर्भरता के दृष्टिकोण से देखने के बजाय, इसे समाज के एक समृद्ध और प्रभावशाली हिस्से के रूप में स्वीकार करना होगा। आने वाले वर्षों में जब 60+ उम्र के नागरिकों की संख्या अभूतपूर्व स्तर पर होगी, तब उनके लिए समावेशी, सशक्त और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना हर राष्ट्र की प्राथमिकता होनी चाहिए।


निष्कर्ष:
2050 की ओर बढ़ते हुए, वैश्विक समाज के सामने एक स्पष्ट प्रश्न है—क्या हम समय रहते अपने नीतिगत ढांचे को अनुकूल बना पाएंगे? अगर हाँ, तो वृद्धजन न केवल समाज की रीढ़ बन सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक भी।


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